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हरियाणा में छात्रवृत्ति के नियम बदले, अब उपस्थिति पर मिलेगा पैसा

By Nov 29, 2025

हरियाणा सरकार ने शिक्षा के स्तर में सुधार और छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छात्रवृत्ति के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को उनकी उपस्थिति के आधार पर ही छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य छात्रों को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करना है।

इस संबंध में जारी निर्देशों के अनुसार, अभिभावकों को अपने बच्चों की किसी भी प्रकार की छुट्टी के लिए अब व्हाट्सएप के माध्यम से स्कूल के अधिकृत नंबर पर प्रार्थना पत्र भेजना अनिवार्य होगा। बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को गैरहाजिर माना जाएगा और उनकी छात्रवृत्ति रोकी जा सकती है। यह कदम उन छात्रों और अभिभावकों को संबोधित करने के लिए उठाया गया है जो उपस्थिति को लेकर गंभीर नहीं हैं, जिससे सीखने के परिणामों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि कई सरकारी विद्यालयों में छात्रों की दैनिक उपस्थिति अपेक्षा से काफी कम रहती है। औचक निरीक्षणों और रिपोर्टों से यह भी पता चला है कि सीखने के परिणामों में निम्न स्तर का एक प्रमुख कारण छात्रों की अत्यधिक अनुपस्थिति है। इस स्थिति से निपटने के लिए, विद्यालय प्रमुखों और शिक्षकों को छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी छात्र को बिना विधिवत आवेदन के अनुपस्थित नहीं रहने दिया जाएगा।

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई छात्र लगातार तीन दिन बिना किसी सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो संबंधित कक्षा अध्यापक को न केवल माता-पिता या अभिभावक से संपर्क करना होगा, बल्कि अनुपस्थिति के कारण की जानकारी प्राप्त कर उसे स्कूल रिकॉर्ड में दर्ज भी करना होगा। लगातार सात दिन अनुपस्थित रहने वाले छात्र की सूचना एमआईएस पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। दस दिन से अधिक अनुपस्थित रहने वाले छात्रों के नाम को ‘ड्रापआउट कैटेगरी’ के रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा और उन्हें स्कूल में वापस लाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। यदि ऐसे किसी छात्र का नाम काट दिया जाता है और वह पुनः प्रवेश के लिए आवेदन करता है, तो उसे बिना किसी शुल्क के तत्काल प्रवेश दिया जाएगा।

निपुण हरियाणा के तहत हुए मूल्यांकन में खराब प्रदर्शन करने वाले 220 सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों से भी जवाब तलब किया जाएगा। इन स्कूलों के विद्यार्थियों का शिक्षण स्तर अपेक्षित मानकों से काफी नीचे पाया गया है। इन स्कूल मुखियाओं को अपने विद्यालयों में निम्न अधिगम स्तर के कारणों का विश्लेषण करते हुए एक विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें अब तक किए गए प्रयासों और भविष्य में सुधार के लिए अपनाई जाने वाली रणनीतियों का उल्लेख हो। यह कदम प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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