हरदोई के 75 ‘खास भक्तों’ का अयोध्या के लिए रवाना, राम मंदिर में फहराएंगे ध्वजा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 नवंबर को अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर रामलला के समक्ष पूजित ध्वजा फहराने के ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनेंगे। इस पावन अवसर पर साधु-संतों सहित बड़ी संख्या में गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे। इस महत्वपूर्ण आयोजन को लेकर हरदोई जिले से 75 विशेष भक्तों का चयन किया गया है, जिन्हें सम्मानित कर अयोध्या भेजा जाएगा।
विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष आशीष माहेश्वरी ने बताया कि सोमवार को जिले से 75 चयनित भक्तों को अयोध्या के लिए रवाना किया जाएगा। यह भक्त प्रधानमंत्री द्वारा ध्वजारोहण के इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे। विहिप ने इन भक्तों के अयोध्या जाने और वहां से वापस आने की समस्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित कर ली हैं।
उन्होंने आगे बताया कि सोमवार को सरकुलर रोड पर स्थित स्वास्तिका सेंटर के निकट सभी भक्तों को एकत्र किया जाएगा। यहां उन्हें पटका पहनाकर सम्मानित किया जाएगा, जिसके उपरांत उन्हें विशेष बसों के माध्यम से अयोध्या के लिए प्रस्थान कराया जाएगा। इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन सहित कई अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहेंगे।
विहिप जिलाध्यक्ष माहेश्वरी ने इस बात पर जोर दिया कि जिले से जिन 75 भक्तों को निमंत्रण मिला है, वे सर्व समाज के प्रतिनिधि हैं। इनमें कृष्णपाल दिवाकर, कमलेश वाल्मीकि, आकाश कुमार, संजीव कुमार यादव, हरिशंकर गौतम, रामराज, सर्वेश, रामनरेश, रामपाल कश्यप, हरिश्चंद्र, नागेंद्र, रामवीर कठेरिया, रनागेश्वर, राममूर्ति वर्मा, रामशंकर, सतीश चंद्र, सुशील वाल्मीकि, रजनीश गौतम, राकेश कुमार, नन्हेलाल, शैलेंद्र कुमार वर्मा, राजेश कुमार, गौरव, रामविलास, बेबी कश्यप, कमलेश, अवधेश, आशुतोष कुमार, नन्हे लाल, उजागर, हरिश्चंद्र, श्रीपाल, रविंद्र, रामचंद्र, वीरपाल कठेरिया, मुकेश कुमार कश्यप, राधाकृष्ण, बालक प्रजापति, शिवनाथ, जगदीश प्रसाद, सर्वेश धोबी, वीरेंद्र, रामदास गौतम, राजू कनौजिया, विनोद कश्यप, राघवेंद्र दिवाकर, नवल किशोर, हरिश्चंद्र कनौजिया, काली चरन, हरिश्चंद्र, सूरज पाल सिंह, मिथिलेश कुमार, रजनीश कुमार सहित कुल 75 भक्त शामिल हैं।
राम मंदिर में होने वाले ध्वजारोहण को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट है। रामनगरी में आने वाले सभी वाहनों की गहन जांच की जा रही है। यह आयोजन न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी है।
