हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में सुस्ती: 5 साल में सिर्फ 10% रिटर्न के पीछे की कहानी
एक समय भारतीय शेयर बाजार में कंज्यूमर सेक्टर का पर्याय मानी जाने वाली हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (HUL) के शेयर पिछले पांच वर्षों में निवेशकों को खास रिटर्न नहीं दे पाए हैं। इस अवधि में कंपनी के शेयर ने मुश्किल से 10% का रिटर्न दिया है, जबकि इसी दौरान शेयर बाजार का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स लगभग दोगुना हो गया है। यह प्रदर्शन विशेष रूप से तब निराशाजनक है जब हम 2000 के दशक के मध्य से 2021 तक HUL के शानदार प्रदर्शन को देखते हैं, जब इसने निवेशकों की दौलत को कई गुना बढ़ाया था। वर्तमान में, ITC और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों ने अपने शेयरधारकों को कहीं बेहतर रिटर्न दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि HUL के शेयर के सुस्त प्रदर्शन का एक मुख्य कारण यह है कि कंपनी का शेयर अभी भी प्रीमियम वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है, जबकि इसकी वृद्धि दर धीमी हो गई है। वित्त वर्ष 2025 में, HUL का राजस्व 60,680 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में केवल 2% की मामूली वृद्धि दर्शाता है। इसी तरह, लाभ में भी मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। एक विशालकाय कंपनी के लिए, जिसकी कमाई पहले से ही काफी अधिक है, यह विकास दर धीमी मानी जा रही है।
विश्लेषकों के अनुसार, धीमी वृद्धि का एक बड़ा कारण उपभोक्ताओं की बदलती आदतें हैं। भारतीय उपभोक्ता अब अधिक सचेत हो गए हैं और खरीदारी के फैसले सोच-समझकर ले रहे हैं। विशेष रूप से पर्सनल केयर सेगमेंट में, युवा पीढ़ी नए और उभरते ब्रांडों जैसे Mamaearth, Plum, और Wow की ओर आकर्षित हो रही है। HUL के पारंपरिक ब्रांड, जैसे हॉर्लिक्स और बूस्ट, अब उस गति से नहीं बढ़ पा रहे हैं जितनी पहले बढ़ते थे। हालांकि, होम केयर सेगमेंट में कंपनी की स्थिति मजबूत बनी हुई है, जहां सर्फ एक्सेल और रिन जैसे ब्रांड अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
नई सीईओ प्रिया नायर के नेतृत्व में, HUL अपनी विकास रणनीति को पुनर्जीवित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कंपनी अब वॉल्यूम-आधारित विकास, उपभोक्ताओं के व्यवहार का बारीकी से विश्लेषण, और डिजिटल व क्विक-कॉमर्स चैनलों के विस्तार पर जोर दे रही है। इन नई रणनीतियों से उम्मीद है कि कंपनी अपनी खोई हुई गति को वापस पाएगी और शेयरधारकों के लिए मूल्य सृजन को बढ़ाएगी।
