हिंद महासागर में भूकंप, बार-बार झटके दे रहा सागर, आफ्टरशॉक का खतरा
गुरुवार देर शाम हिंद महासागर में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई, जबकि इसकी गहराई मात्र 10 किलोमीटर थी। भूकंप विज्ञानियों के अनुसार, इतनी कम गहराई पर आए भूकंपों से आफ्टरशॉक (aftershock) का खतरा काफी बढ़ जाता है।
यह इलाका पिछले कुछ समय से भूकंपीय गतिविधियों से प्रभावित रहा है। इसी क्षेत्र में दिन में पहले 6.4 तीव्रता का और उसके बाद 4.8 तीव्रता का एक और भूकंप भी दर्ज किया गया था। इन सभी भूकंपों की गहराई भी 10 किलोमीटर के आसपास ही बताई जा रही है।
भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि कम गहराई वाले भूकंप आम तौर पर अधिक खतरनाक होते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सीस्मिक तरंगों को सतह तक पहुंचने के लिए कम दूरी तय करनी पड़ती है। इस कारण जमीन में कंपन अधिक होता है, जिससे इमारतों और अन्य ढांचों को अधिक नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है और जान-माल का खतरा भी बढ़ जाता है।
यह घटना 26 दिसंबर 2004 के विनाशकारी भूकंप की याद दिलाती है, जब हिंद महासागर में आए 9.2-9.3 तीव्रता के भूकंप ने भयंकर सुनामी को जन्म दिया था। इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के पास आए इस भूकंप और उसके बाद आई सुनामी ने 14 देशों में लगभग 2,27,898 लोगों की जान ले ली थी और भारी तबाही मचाई थी। यह 21वीं सदी की सबसे घातक प्राकृतिक आपदाओं में से एक थी, जिसने इस क्षेत्र के तटीय समुदायों के जीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया था।
