हाईवे पर ऑटो-ई-रिक्शा का कहर: 5 दिन में 9 मौतें, प्रशासन बेखबर
मुरादाबाद के हाईवे पर ऑटो और ई-रिक्शा के बेखौफ संचालन ने सड़कों पर मौत का तांडव मचा रखा है। प्रतिबंध के बावजूद, ये वाहन धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं और पिछले पांच दिनों में दो भीषण सड़क हादसों में नौ लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। ताजा घटना गुरुवार रात की है, जब एक ई-रिक्शा अज्ञात वाहन की चपेट में आ गया, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई। घटनास्थल पर खून के निशान इस भयावहता की गवाही दे रहे हैं, लेकिन संभागीय परिवहन विभाग के अधिकारी सुध लेने को तैयार नहीं हैं।nnयह पहली बार नहीं है जब हाईवे पर ऑटो-ई-रिक्शा के कारण जान गई हो। इससे पहले, 16 नवंबर को कांठ रोड पर एक अधिवक्ता के बहनोई विपिन भटनागर की मौत ने शहर को झकझोर दिया था। लोगों ने तब चेकिंग बढ़ाने और अवैध चालकों पर सख्ती की मांग की थी, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी रही। बीते रविवार को लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे पर एक ई-रिक्शा के रोडवेज बस से टकराने के बाद एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत हो गई थी। इन घटनाओं के बावजूद, यातायात पुलिस द्वारा चलाए गए अभियान का कोई खास असर नहीं दिख रहा है।nnसूत्रों के अनुसार, मंडलायुक्त आंजनेय सिंह ने कई बार सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटो-ई-रिक्शा के संचालन को सख्ती से रोकने के निर्देश दिए थे। संभागीय परिवहन विभाग और यातायात पुलिस को स्पष्ट आदेश भी जारी किए गए थे। लेकिन इन आदेशों का जमीनी स्तर पर कोई पालन नहीं हो रहा है। संभल रोड पर ट्रिपल सवारी भरकर ऑटो दिनभर फर्राटा भरते नजर आते हैं, जबकि रात में मुरादाबाद से संभल, जोया, चंदौसी तक ई-रिक्शा निर्बाध रूप से दौड़ते रहते हैं। रेलवे स्टेशन के सामने से ही देर रात हाईवे रूट की सवारियां बिठाकर ये वाहन निकल जाते हैं, जो पुलिस चौकी और विभागीय कार्यालयों के बिल्कुल नजदीक होता है, फिर भी किसी की नजर नहीं पड़ती।nnकुंदरकी हादसे में जान गंवाने वाले मोहम्मद जैद अपने परिवार में सबसे छोटे थे और पिता की बीमारी के चलते परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी का एक हिस्सा उठाते थे। वह अपने भाई अनीस के साथ फल का ठेला लगाते थे। गुरुवार रात दुकान बंद करके घर लौटते समय वे ऑटो में सवार थे, तभी यह हादसा हुआ। यह घटना स्थानीय लोगों के दर्द और प्रशासन की लापरवाही को उजागर करती है। ग्रामीणों का कहना है कि हर हफ्ते कोई न कोई हादसा होता है, लेकिन विभाग सिर्फ कागजों में कार्रवाई करता है। रात के अंधेरे में तो हालत और भी खतरनाक हो जाती है, जब ई-रिक्शा चालक तेज रफ्तार में ट्रक-बसों के बीच मौत से खेलते नजर आते हैं।”
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