हाईवे पर शराब की दुकानें हटाने के आदेश: हाईकोर्ट ने सरकार को दो महीने में कार्रवाई के निर्देश दिए
राजस्थान में नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे संचालित हो रही शराब की दुकानों पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इन शराब ठेकों को दो महीने की अवधि में हटाने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है। न्यायालय ने सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि नगरपालिका या शहरी सीमा की आड़ में हाईवे को ‘लिकर-फ्रेंडली कॉरिडोर’ बनाया जा रहा है, जिसे अब कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अदालत ने साफ किया है कि भले ही ये शराब की दुकानें शहरी या नगरपालिका सीमा के अंतर्गत आती हों, यदि वे हाईवे के 500 मीटर के दायरे में हैं, तो उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है। यह महत्वपूर्ण फैसला राज्य में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों और ‘ड्रिंक एंड ड्राइव’ की घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लिया गया है।
राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में कुल 7665 शराब की दुकानें हैं, जिनमें से 1102 दुकानें नेशनल और स्टेट हाईवे पर स्थित हैं। इन दुकानों से सरकार को सालाना लगभग 2221.78 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। हालांकि, कोर्ट ने सरकार की राजस्व संबंधी दलील को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि ‘नगरपालिका क्षेत्र’ की आड़ में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और उनका मजाक बनाया जा रहा है।
न्यायालय ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के जीवन की सुरक्षा को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि जनहित और सुरक्षा के मुकाबले राजस्व को प्राथमिकता नहीं दी जा सकती। कोर्ट की इस सख्त टिप्पणी से स्पष्ट है कि हाईवे पर शराब की उपलब्धता और उससे जुड़े खतरों को लेकर न्यायपालिका बेहद चिंतित है और सरकार को इस दिशा में तत्काल प्रभावी कदम उठाने होंगे।
