हापुड़ में वकील से 4.82 लाख की ठगी, पुराने सिक्कों के लालच में फंसे
हापुड़ जनपद में साइबर ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें 40 साल से वकालत कर रहे एक वकील को पुराने सिक्के खरीदने के लालच में लगभग 4.82 लाख रुपये गंवाने पड़े। यह घटना जिले में साइबर अपराध के बढ़ते ग्राफ को दर्शाती है।
सूत्रों के अनुसार, सिटी कोर्ट में कार्यरत वकील सुनील कुमार अग्रवाल को 15 अक्टूबर 2025 को एक अनजान मोबाइल नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुराने सिक्के और नोट खरीदने वाली एक प्रतिष्ठित कंपनी का प्रतिनिधि बताया और दावा किया कि वह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अप्रूव्ड है। जालसाजों ने पीड़ित को विश्वास दिलाने के लिए WhatsApp पर RBI के कुछ नकली सर्टिफिकेट भी भेजे। इन नकली दस्तावेजों को देखकर वकील ठगों के जाल में फंस गए।
इसके बाद, 15 से 18 अक्टूबर 2025 के बीच, वकील ने आरोपियों के बताए दस अलग-अलग बैंक खातों में कुल 4.82 लाख रुपये की धनराशि जमा करवा दी। इन खातों के नाम अमन कुमार, ऋतिक, लोकेश कुमार, अरुण कुमार, समीर छेत्री, पंकज सिंह, बबलू कुमार, विजय सक्सेना, राज सिंह ज्ञानी और शंकर कादयान बताए जा रहे हैं।
धोखाधड़ी का एहसास तब हुआ जब राज सिंह ज्ञानी नामक आरोपी ने पीड़ित से अतिरिक्त जीएसटी के नाम पर 1.50 लाख रुपये और जमा करने के लिए दबाव बनाया। इस बात पर वकील को शक हुआ और उन्होंने मामले की तह तक जाने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें पूरी सच्चाई का पता चला।
ठगी का शिकार होने के बाद, पीड़ित वकील ने 27 अक्टूबर 2025 को हापुड़ देहात थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। बाद में उन्होंने पुलिस अधीक्षक से भी संपर्क किया। पुलिस अधीक्षक ज्ञानंजय सिंह ने बताया कि साइबर क्राइम थाने में आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। पुलिस जालसाजों के मोबाइल फोन और बैंक खातों की डिटेल्स के आधार पर उनकी पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही है। खातों को फ्रीज करने की कार्रवाई भी की जा रही है।
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे YouTube या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दिखने वाले पुराने सिक्के और नोट खरीदने के विज्ञापनों के झांसे में न आएं। किसी भी ऑनलाइन लेन-देन से पहले, विशेषकर जब कोई बड़ी रकम शामिल हो, तो स्थानीय पुलिस स्टेशन या साइबर सेल से संपर्क कर उसकी सत्यता की पुष्टि अवश्य करा लें। यह घटना लोगों को ऑनलाइन धोखाधड़ी के प्रति और अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल देती है।
