गुरुग्राम को अभी तक नहीं मिला अपना बस स्टैंड, विकास के दावों पर सवाल | Gurugram Infra News
गुरुग्राम, जिसे साइबर सिटी और मिलेनियम सिटी जैसे नामों से जाना जाता है, को 2025 के अंत तक भी एक बस स्टैंड नहीं मिल पाया है। शहर के विकास और बुनियादी ढांचे के दावों के बीच, सार्वजनिक परिवहन की यह मूलभूत सुविधा आज भी एक सपना बनी हुई है। टीन शेड और अस्थायी ढांचों के नीचे बस स्टैंड का संचालन यात्रियों के लिए गर्मी, सर्दी और बरसात में परेशानी का सबब बन रहा है।
शहर में हेलीपोर्ट और डिज्नीलैंड जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की चर्चाओं के बीच, सार्वजनिक परिवहन की कमी लोगों को ऑटो, ई-रिक्शा, कैब और निजी वाहनों पर निर्भर रहने को मजबूर कर रही है। इससे न केवल यात्रियों को असुविधा हो रही है, बल्कि शहर में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है।
वर्ष 2015 में जर्जर घोषित होने के बाद से पुराने बस स्टैंड की इमारत को तोड़ा जा चुका है, और नया बस स्टैंड सीही गांव में प्रस्तावित है, जिसका निर्माण कार्य अभी तक शुरू नहीं हुआ है। मेट्रो की कनेक्टिविटी होने के बावजूद, सिटी बसों की सीमित संख्या और पुराने शहर को मेट्रो से जोड़ने वाली योजनाओं की धीमी गति यात्रियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।
गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन सिटी बस लिमिटेड (जीएमसीबीएल) द्वारा संचालित सिटी बसों की संख्या और रूटों में वृद्धि की तत्काल आवश्यकता है। 2031 तक शहर में 1025 बसों की आवश्यकता का अनुमान है, जिसके लिए पर्याप्त बस डिपो और टर्मिनल जैसे बुनियादी ढांचे का निर्माण भी जरूरी है। पाॅड टैक्सी जैसी भविष्य की योजनाओं का धरातल पर न उतरना, शहर की परिवहन व्यवस्था की लचर स्थिति को दर्शाता है।
सेवानिवृत्त अधीक्षण अभियंता आरके कंसल के अनुसार, बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या के मद्देनजर, पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना समय की मांग है। वर्तमान में निजी वाहनों पर अत्यधिक निर्भरता, भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन की कमी का ही परिणाम है।
