एआई (AI) का बढ़ता प्रभाव: संस्थाओं और शासन व्यवस्था पर गहरा असर
लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के समाज पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों और शिक्षकों को AI के समाजशास्त्रीय आयामों, संस्कृति, शासन व्यवस्था और दैनिक जीवन पर इसके असर के बारे में जागरूक किया गया।
नई दिल्ली पब्लिक एक्शन के रिसर्च निदेशक, प्रोफेसर डॉ. ए. प्रभाहरण ने मुख्य वक्ता के तौर पर शिरकत की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि AI सिर्फ एक तकनीकी विकास नहीं है, बल्कि यह एक शक्तिशाली सामाजिक कारक बनकर उभरा है। यह विभिन्न संस्थाओं के कामकाज, सामाजिक असमानताओं, सरकारी नीतियों और लोगों के डिजिटल जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है।
इस व्याख्यान का आयोजन विद्यार्थियों और शिक्षकों को AI के सामाजिक और शासन संबंधी प्रभावों के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से किया गया था। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष प्रो. प्रमोद कुमार गुप्ता, संकाय सदस्य, शोधार्थी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। डॉ. सुषमा मिश्रा ने कार्यक्रम का समन्वय किया।
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