लुटियंस दिल्ली में भूजल स्तर बढ़ा, बोरवेल फिर होंगे चालू: Delhi groundwater management
लुटियंस दिल्ली में भूजल स्तर का बढ़ना एक नई चुनौती पेश कर रहा है। केंद्रीय भूमिजल बोर्ड की रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रीय राजधानी के इस प्रतिष्ठित क्षेत्र में भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कई स्थानों पर यह स्तर सामान्य से काफी ऊपर पाया गया है, जिससे सीपेज और बहुमंजिला इमारतों की नींव को खतरा पैदा हो गया है।
इस स्थिति से निपटने के लिए, नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। रिपोर्ट के आधार पर, एनडीएमसी ने लंबे समय से बंद पड़े 124 बोरवेल में से 57 को फिर से चालू करने की अनुमति दी है। इसके बाद, जिला प्रशासन ने तत्काल 20 बोरवेल को शुरू करने की मंजूरी दे दी है। इसका उद्देश्य भूजल स्तर को नियंत्रित करना और इसे तय मानक से नीचे लाना है।
केंद्रीय भूमिजल बोर्ड ने एनडीएमसी के अनुरोध पर 14 प्रमुख स्थानों पर 45 दिनों तक विस्तृत सर्वेक्षण किया था। इन स्थानों में अग्रसेन की बावली, बिरला मंदिर, हुमायूं मकबरा, लोधी गार्डन, नेहरू पार्क और सफदरजंग मकबरा जैसे महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं। सर्वेक्षण में पाया गया कि कुछ स्थानों पर भूजल स्तर 10 मीटर जमीन के नीचे (एमबीजीएल) के मानक से काफी ऊपर है, जो चिंताजनक है। उदाहरण के लिए, बुद्धा जयंती पार्क में यह 5 एमबीजीएल और प्रगति मैदान में 91 एमबीजीएल तक दर्ज किया गया।
भूजल स्तर बढ़ने की समस्या केवल सीपेज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इमारतों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। इस समस्या के समाधान के लिए, एनडीएमसी ने पहले भी ऐसे कदम उठाए हैं, जैसे कि पुराना किला के पास भूजल स्तर कम करने के लिए बोरवेल लगाकर पार्कों की सिंचाई शुरू करना। अब, इन नए बोरवेल के संचालन से उम्मीद है कि भूजल स्तर को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकेगा।
