बिहार में बालू घाटों की नीलामी संकट पर सरकार का फोकस, 50 संभावनाशील घाटों को फिर से शुरू करने की तैयारी
बिहार में बालू की आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाने और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी के उद्देश्य से सरकार ने बालू घाटों की नीलामी संकट पर गंभीरता से ध्यान देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में खान एवं भू-तत्व विभाग को ऐसे 50 बालू घाटों की पहचान कर सूची तैयार करने का निर्देश दिया गया है, जो अब तक नीलामी प्रक्रिया में शामिल नहीं हो सके हैं, लेकिन व्यावसायिक दृष्टि से पूरी तरह संभावनाशील माने जा रहे हैं।
राज्य में कई बालू घाट तकनीकी, पर्यावरणीय अथवा प्रशासनिक कारणों से नीलाम नहीं हो पाए थे। कुछ घाटों का क्षेत्रफल अधिक होने या परिवहन व्यवस्था स्पष्ट नहीं होने के कारण भी बोली प्रक्रिया सफल नहीं हो सकी। हालांकि भौगोलिक स्थिति, बालू भंडारण क्षमता और स्थानीय मांग को देखते हुए ये घाट आर्थिक रूप से लाभकारी माने जा रहे हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इन घाटों की नए सिरे से समीक्षा करने का निर्णय लिया है। खान एवं भू-तत्व निदेशक के स्तर पर हुई बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 50 ऐसे बालू घाटों की सूची बनाई जाए, जहां नीलामी की बाधाओं की पहचान कर उन्हें दूर किया जा सके। इस प्रक्रिया में नदी की धारा, पर्यावरणीय स्वीकृति की स्थिति, परिवहन सुविधा, स्थानीय बाजार की मांग और पूर्व की नीलामी स्थिति जैसे बिंदुओं का गहन मूल्यांकन किया जाएगा।
सरकार यह भी संकेत दे चुकी है कि यदि आवश्यक हुआ तो नीलामी की शर्तों में व्यावहारिक बदलाव किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बोलीदाता आगे आएं और नीलामी प्रक्रिया सफल हो सके। पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए घाटों के संचालन से अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। इन 50 बालू घाटों के संचालन में आने से निर्माण कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही बालू की कीमतों में स्थिरता आएगी और राज्य सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। सरकार का मानना है कि वैध और नियंत्रित खनन व्यवस्था मजबूत होने से आम उपभोक्ताओं और निर्माण एजेंसियों को भी राहत मिलेगी।
सूची तैयार होने के बाद इन बालू घाटों को चरणबद्ध तरीके से नीलामी के लिए लाने की योजना है। इससे बालू आपूर्ति संकट के समाधान की दिशा में ठोस प्रगति होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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