गोरखपुर की साड़ियों ने सूरत को दी टक्कर, ‘वोकल फॉर लोकल’ से महिलाओं को मिला रोजगार
गोरखपुर अब सिर्फ अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘वोकल फॉर लोकल’ की पहल को साकार करते हुए, गोरखपुर के खानिमपुर क्षेत्र में आधुनिक और आकर्षक साड़ियों का निर्माण शुरू हो गया है। इन साड़ियों ने पूर्वांचल और पड़ोसी राज्य बिहार के बाजारों में धूम मचा दी है।
युवा उद्यमी सुमित चंद अपने पिता दयाराम के मार्गदर्शन में इस साड़ी फैक्ट्री का संचालन कर रहे हैं। पिता से सूरत में साड़ी निर्माण का हुनर सीखने के बाद, सुमित ने प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत ऋण लेकर खानिमपुर में फैक्ट्री स्थापित की। आधुनिक मशीनों और बाजार की मांग के अनुरूप डिजाइन पर विशेष ध्यान देने के कारण, यहां की साड़ियों की फिनिशिंग और गुणवत्ता बड़े शहरों के ब्रांड्स को टक्कर दे रही है।
इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका सामाजिक प्रभाव है। सुमित चंद की फैक्ट्री से 20-25 स्थानीय महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है। ये महिलाएं साड़ियों की फिनिशिंग, कढ़ाई और पैकिंग जैसे कार्यों में कुशल हो गई हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति सुधरी है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।
गोरखपुर की इन साड़ियों की मांग सिर्फ जिले तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, गोंडा और महराजगंज जैसे पूर्वांचल के जिलों के साथ-साथ बिहार के सिवान, छपरा और गोपालगंज में भी इनकी अच्छी खासी मांग है। शादियों और त्योहारों के सीजन में उत्पादन क्षमता को बढ़ाया जाता है।
स्थानीय व्यापारियों के लिए यह एक बड़ी राहत है। पहले वे सूरत, बनारस या कोलकाता से माल मंगवाते थे, लेकिन अब गोरखपुर में ही गुणवत्तापूर्ण और आकर्षक डिजाइन की साड़ियां उपलब्ध होने से परिवहन लागत में कमी आई है और कस्टमाइज्ड डिजाइन की सुविधा भी मिल रही है।
