गया में नीलगायों का आतंक, किसान रात-रात भर जागकर बचा रहे फसल
गया जिले के शेरघाटी प्रखंड क्षेत्र की चिलीम और बेला पंचायत के किसान इन दिनों नीलगायों के बढ़ते आतंक से बेहद परेशान हैं। नीलगायों के झुंड तैयार खड़ी फसलों से लेकर लहलहाती खेती को भी कुछ ही मिनटों में तबाह कर दे रहे हैं। किसानों के अनुसार, पहले नीलगायों का झुंड केवल रात में खेतों में आता था, लेकिन अब वे दिन-दोपहर में भी खेतों पर धावा बोल देते हैं।
पथलकट्टी गांव के एक किसान श्रीकांत यादव बताते हैं कि नीलगायों का झुंड बड़ा होने के कारण अकेले उन्हें भगाना संभव नहीं है। ये झुंड में हमला करने लगते हैं, और केवल आग से ही कुछ डरते हैं। अपनी धान और केला की फसलों को बचाने के लिए किसान रात में जागकर रतजगा कर रहे हैं। वे समूह में खेतों के चारों कोनों पर आग जलाकर रखते हैं और जैसे ही नीलगायों के आने की आहट होती है, पुआल डालकर आग तेज करते हैं और शोर मचाकर उन्हें भगाने की कोशिश करते हैं।
दिन में भी जब तक 10-20 किसान लाठी-डंडे लेकर एक साथ न पहुंचें, तब तक नीलगायों का झुंड खेतों में फसल चरता रहता है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव से खेत दूर होने के कारण दिन में तो किसान जुट जाते हैं, लेकिन रात में ठंड बढ़ने से कई बार पर्याप्त लोग इकट्ठा नहीं हो पाते। ऐसे में नीलगायों के झुंड मनमाने तरीके से फसलें बर्बाद कर रहे हैं। श्रीकांत यादव ने बताया कि उन्होंने जी-नाइन केला की उत्कृष्ट किस्म की खेती तैयार की थी, लेकिन शनिवार की रात नीलगायों ने लगभग दो कट्ठा में लगी पूरी केला फसल नष्ट कर दी।
भुजिया फैक्ट्री के पास धान की रखवाली कर रहे दुखी यादव ने भी अपनी लाचारी व्यक्त की। उन्होंने बताया कि उनकी आंखों के सामने पांच नीलगायों का झुंड धान की फसल चर रहा था, लेकिन अकेले होने के कारण वे उन्हें भगा नहीं पा रहे थे। उन्हें डर है कि भगाने जाने पर नीलगाय हमला कर सकती हैं, इसलिए वे लाचार होकर देख रहे हैं। जो फसल बचेगी, वही घर ले जा पाएंगे।
किसानों का कहना है कि यदि सरकारी स्तर पर इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में खेती करना और भी मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों की यह लाचारगी लगातार बढ़ती जा रही है और नीलगायों के आतंक से उनकी आजीविका पर गंभीर संकट मंडराने लगा है। उन्होंने सरकार से इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की गुहार लगाई है।
