गया में ‘हर घर मशरूम योजना’ से बदले किसानों के हालात, 50 हजार परिवार आत्मनिर्भर
गया जिले ने मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में पूरे बिहार में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। जिले के लगभग 50,000 से अधिक परिवार इस लाभकारी व्यवसाय से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहे हैं। ‘हर घर मशरूम योजना’ की बदौलत यह संभव हो पाया है, जिसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है।
मशरूम उत्पादन की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसकी कम लागत और अधिक लाभ देने की क्षमता है। जिला उद्यान पदाधिकारी के अनुसार, इस योजना के तहत जिले के लगभग हर गांव में चार से पांच परिवार मशरूम उत्पादन से जुड़े हुए हैं। यह व्यवसाय न केवल किसानों को अतिरिक्त आय का जरिया दे रहा है, बल्कि जिले को बिहार के नंबर एक मशरूम उत्पादक जिले के रूप में स्थापित कर रहा है।
विशेष रूप से, बटन मशरूम का उत्पादन सर्दियों के मौसम में अपने चरम पर होता है, जिससे किसानों को अच्छी आमदनी होती है। वहीं, आधुनिक एसी यूनिट के माध्यम से मशरूम का उत्पादन अब साल भर किया जा रहा है। वर्तमान में, लगभग 15 से 20 परिवार इस आधुनिक तकनीक का उपयोग करके बारहमासी उत्पादन कर रहे हैं। यह तकनीक वजीरगंज, कोंच, मानपुर, बोधगया, गनर और इमामगंज जैसे क्षेत्रों में तेजी से फैल रही है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
गया में उत्पादित मशरूम की मांग केवल स्थानीय बाजार तक ही सीमित नहीं है। इसकी गुणवत्ता और स्वाद के कारण दिल्ली, कोलकाता, रांची और जमशेदपुर जैसे महानगरों में भी इसकी खूब मांग है। बाजार में इतनी अधिक मांग है कि किसानों को अपने उत्पाद की बिक्री को लेकर किसी भी तरह की चिंता नहीं सताती। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन और निरंतर आपूर्ति ने गया के मशरूम को बड़े बाजारों में एक विशेष पहचान दिलाई है।
मशरूम उत्पादन की सबसे बड़ी खासियत इसका आसान तरीका है। धान और गेहूं के भूसे से तैयार मशरूम बैग के माध्यम से किसान कम समय और कम लागत में अच्छी मात्रा में मशरूम का उत्पादन कर सकते हैं। कृषि विभाग भी इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए किसानों को प्रशिक्षण और अन्य आवश्यक सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस तरह, ‘हर घर मशरूम योजना’ गया के किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का एक सफल मॉडल बनकर उभरी है।
