गुरुग्राम की हवा अभी भी खराब, AQI 258, विशेषज्ञों ने दी खास सलाह
गुरुग्राम में बीते 24 घंटों में हल्की हवा चलने से प्रदूषण स्तर में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन शहर की हवा अभी भी खराब श्रेणी में बनी हुई है। शनिवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 258 दर्ज किया गया, जबकि औद्योगिक क्षेत्र मानेसर में यह आंकड़ा 245 रहा।
विशेषज्ञों का मानना है कि हवा के कारण प्रदूषक कण कुछ हद तक छंट गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर सुधार के लिए उठाए जाने वाले ठोस कदमों के अभाव में प्रदूषण में खास कमी नहीं आ पा रही है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि सड़कों पर पानी का छिड़काव लगभग बंद है, जिससे वाहन चलने पर धूल हवा में उड़ जाती है। कई मुख्य मार्गों पर यांत्रिक सफाई की कमी भी साफ दिख रही है। निर्माण स्थलों पर उचित कवरिंग और बैरिकेडिंग न होने से धूल लगातार वातावरण में फैल रही है।
इसके परिणामस्वरूप, लोग गले में खराश, आंखों में जलन, सिरदर्द और सांस संबंधी समस्याओं की शिकायत कर रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार, खराब वायु गुणवत्ता बच्चों, बुजुर्गों और विशेष रूप से अस्थमा के मरीजों के लिए अत्यधिक हानिकारक है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि ऐसे मौसम में सुबह और शाम के समय बाहर निकलने से बचना चाहिए और यदि बाहर निकलना आवश्यक हो तो मास्क का प्रयोग अवश्य करें। प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण अस्पतालों में सांस और एलर्जी संबंधी रोगों से पीड़ित मरीजों की संख्या में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से प्रदूषण का स्तर लगातार ‘खराब’ बना हुआ है, लेकिन न तो जल छिड़काव बढ़ाया गया है और न ही सड़कों की सफाई को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि संबंधित एजेंसियां समय रहते सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों की सख्त निगरानी और कूड़ा जलाने पर रोक जैसे कदम उठाती हैं, तो शहर की वायु गुणवत्ता में तेजी से सुधार लाया जा सकता है।
