गोरखपुर: ट्रांसफार्मर बेचने के आरोप में जेई-एसडीओ निलंबित, चालकों पर एफआईआर
गोरखपुर के भटहट उपकेंद्र से तीन एमवीए क्षमता के एक महंगे ट्रांसफार्मर को बेचने के मामले में बिजली विभाग में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार, इस ट्रांसफार्मर की कीमत लगभग 17 लाख रुपये बताई जा रही है, जबकि वर्तमान बाजार मूल्य 40 लाख रुपये से अधिक है। इस गंभीर मामले में बिजली विभाग के जेई अजय सिंह और एसडीओ रामइकबाल प्रसाद को निलंबित कर दिया गया है।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में एक बड़ा खेल सामने आया है। ट्रांसफार्मर बेचने जैसे बड़े मामले में एफआईआर केवल दो वाहनों के चालकों और कुछ अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज कराई गई है। ट्रांसफार्मर बेचने की बात को छुपाते हुए इसे चोरी का मामला बताया गया है। विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर जेई और एसडीओ पर कार्रवाई की गई है, लेकिन एफआईआर में उनके नाम शामिल न किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, दैनिक जागरण ने आठ अक्टूबर को इस ट्रांसफार्मर बिक्री का पर्दाफाश किया था। बिजली निगम के चेयरमैन के निर्देश पर विद्युत वितरण मंडल प्रथम के अधीक्षण अभियंता की अध्यक्षता में एक समिति ने जांच की। जांच रिपोर्ट में जेई और एसडीओ की संलिप्तता पाए जाने पर उन्हें निलंबित किया गया और मुख्य अभियंता ने एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।
निलंबित जेई अजय सिंह के स्थान पर कार्यभार संभालने वाले कार्यवाहक जेई मिथलेश कुमार विश्वकर्मा ने तहरीर दर्ज कराई है। इसमें उन्होंने लिखा है कि 25 अगस्त 2024 को तीन एमवीए क्षमता का पुराना ट्रांसफार्मर क्रेन और ट्रक से ले जाया गया था। चालकों पर आरोप है कि उन्होंने अज्ञात लोगों के साथ मिलकर इसे भंडार खंड में जमा करने के बजाय धोखाधड़ी से बेच दिया। यह जानकारी विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट से मिली।
इस मामले में एंटी थेफ्ट थाने में दर्ज कराई गई तहरीर पर भटहट के कार्यवाहक जेई, कार्यवाहक एसडीओ और गुलरिहा खंड के कार्यवाहक अधिशासी अभियंता के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है ताकि असली दोषियों को पकड़ा जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। एंटी थेफ्ट थाने के प्रभारी निरीक्षक ने खुद मामले की विवेचना करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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