गोरखपुर में फैक्ट्री में भीषण आग, धुएं से छाया इलाका, पुलिस ने लोगों को किया सचेत
गोरखपुर के गीडा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित रूंगटा इंडस्ट्रीज में गुरुवार को आग लगने की एक भीषण घटना ने पूरे इलाके को भय और अफरा-तफरी के माहौल में डुबो दिया। फैक्ट्री से निकलती ऊंची लपटें और पाइपलाइन से आती धमाकों जैसी आवाजें इतनी डरावनी थीं कि आसपास के घरों में रहने वाले लोग दिनभर दहशत में रहे। पुलिस और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर तुरंत कार्रवाई करते हुए घर-घर जाकर लोगों को सजग रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी। इस चेतावनी के बाद कई लोग अपना जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित स्थलों की ओर रवाना होने लगे।
आग लगने की घटना के बाद फैक्ट्री से निकला धुआं देर रात तक हवा में फैला रहा। लोग अपने घरों में रहने की बजाय सड़कों पर खड़े होकर आसमान छूती लपटों और धुएं के गुबार की दिशा और स्थिति को देखते रहे। जैसे-जैसे आग फैलने लगी, पुलिस ने आसपास के रिहायशी इलाकों में जाकर लोगों को सतर्क करना शुरू किया। जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो धुएं की मोटी परत देखकर वे हैरान रह गए। सायरन की लगातार आवाजें और धुएं की तीखी गंध ने पूरे दिन लोगों को बेचैन रखा।
धुएं का गुबार इतना घना था कि हाईवे तक फैल गया, जिससे सड़क से गुजरने वाले बाइक और कार चालकों को भी रुकना पड़ा और वे आसपास के लोगों व पुलिसकर्मियों से घटना के बारे में पूछते रहे। कुछ लोगों ने सड़क किनारे खड़े पुलिसकर्मियों से जानकारी लेने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने का इशारा किया। एक समय ऐसा भी आया जब पूरे क्षेत्र में सायरनों की आवाजें एक साथ गूंजने लगीं, जिससे लोगों को यह अहसास हो गया कि आग की भयावहता काफी बढ़ गई है। छतों पर चढ़े युवाओं ने दूर से ही आग का यह भयावह नजारा देखा, जो नारंगी रोशनी के रूप में आसमान में चमक रहा था।
हवा का रुख लगातार बदल रहा था, जिसके कारण धुआं अलग-अलग बस्तियों की ओर जा रहा था। कई घरों में खिड़कियां बंद करने के बावजूद धुएं की तेज गंध अंदर तक पहुंच रही थी, जिससे लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी। लोग एक-दूसरे को फोन कर अपने और अपने प्रियजनों का हालचाल ले रहे थे, यह पता कर रहे थे कि कौन कहां है और किसने घर छोड़ दिया है।
इलाके के कुछ लोगों ने बताया कि उन्हें लगा कि शायद कोई बड़ा टैंक फट गया है, क्योंकि कई बार अचानक तेज धमाके हुए थे। बाद में उन्हें पता चला कि यह आवाजें फैक्ट्री की पाइपलाइन में हवा और आग की प्रतिक्रिया के कारण निकल रही थीं। धुएं की घनी परत के कारण कुछ देर के लिए सड़क की बत्तियां भी धुंधली नजर आने लगीं। बच्चों में डर साफ देखा जा सकता था, कई बच्चे अपनी मां की गोद में सिर छिपाए सहमे हुए थे। महिलाएं बार-बार यह सवाल पूछती रहीं कि क्या वे अपने घरों में वापस जा पाएंगे।
पुलिस की आवाजें गलियों में गूंजती रहीं, ‘सभी लोग दूर हटें… रास्ता खाली करें…’। लोग बैरिकेटिंग के पार खड़े होकर फैक्ट्री की दिशा में लगी आग को देखते रहे और स्थिति के सामान्य होने का इंतजार करते रहे। फैक्ट्री से काम खत्म करके निकले कर्मचारी भी अलग-अलग झुंडों में बाहर आए। किसी के हाथ में मोबाइल था, तो किसी के हेलमेट, और कुछ कर्मचारियों के कपड़ों पर राख की परत जमी हुई थी, जो इस भीषण आग की भयावहता को बयां कर रही थी।
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