गंगा पर सरयू की तर्ज पर बनेगा मजबूत तटबंध, शासन से मिली हरी झंडी
उत्तर प्रदेश में अब गंगा नदी पर भी सरयू नदी की तरह ही मजबूत और टिकाऊ तटबंध का निर्माण किया जाएगा। शासन ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिससे गंगा के किनारे बसे गांवों को बाढ़ और कटाव के खतरे से सुरक्षा मिलेगी। बिजनौर जिले में गंगा के रावली बैराज तटबंध को आर्टिकुलेटिंग कांक्रीट ब्लाक मैट्रेस (एसीबीएम) तकनीक से बनाने का प्रस्ताव सिंचाई विभाग द्वारा भेजा गया था, जिसे अब हरी झंडी मिल गई है।
गंगा नदी, जो बिजनौर जिले में लगभग 115 किलोमीटर की धारा में बहती है, अक्सर पहाड़ों से आने वाले अतिरिक्त पानी के कारण उफान पर आ जाती है। इस वर्ष विशेष रूप से रावली के खादर क्षेत्र में गंगा की धारा ने तटबंध को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था, जिससे तटबंध टूटने का गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। उस समय तटबंध को बचाने के लिए सिंचाई विभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के संयुक्त प्रयासों से दिन-रात काम करके मिट्टी डाली गई थी और बड़ी आपदा को टाला गया था।
अब, भविष्य में ऐसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए, तटबंध को एसीबीएम तकनीक से फिर से बनाया जाएगा। यह तकनीक पहले उत्तर प्रदेश में सरयू नदी पर बस्ती, संत कबीरनगर और देवरिया जिलों में सफलतापूर्वक अपनाई जा चुकी है। इस परियोजना के तहत लगभग 1060 मीटर लंबे तटबंध का निर्माण किया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 40 करोड़ रुपये होगी। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो अगली बरसात से पहले इस कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
एसीबीएम तकनीक में, तटबंध के क्षतिग्रस्त ढलान (स्लोप) को ठीक करके विशेष निर्माण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें जियो शीट के बैग के अंदर दबाव के साथ कंक्रीट भरा जाएगा, जिससे लचीले कंक्रीट के ब्लॉक बनेंगे। इन ब्लॉकों को लोहे की केबल से जोड़ा जाएगा, जो मकान की छत में सरिया की तरह काम करेगा। यह लचीलापन तटबंध को पानी के तेज बहाव और कटाव के प्रति अधिक प्रतिरोधी बनाएगा। पूरे ढलान और तल पर कंक्रीट की एक मजबूत चादर बिछाई जाएगी, जिससे तटबंध की मजबूती सुनिश्चित होगी।
सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि एसीबीएम विधि से तटबंध बनाने की सैद्धांतिक अनुमति मिल गई है और इस पर कार्य प्रगति पर है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस तकनीक से बनने वाला तटबंध अत्यंत मजबूत होगा और भविष्य में कटाव की समस्या से निजात मिलेगी। यह कदम गंगा किनारे रहने वाले लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगा।
