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गंगा एक्सप्रेस-वे का निर्माण अधर में: कब फर्राटा भरेंगे वाहन?

By Nov 29, 2025

प्रयागराज से मेरठ तक निर्माणाधीन 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेस-वे, जिसका बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, अभी भी पूरा नहीं हो सका है। प्रदेश के 12 जिलों और 518 गांवों से होकर गुजरने वाले इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य दिसंबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन सूत्रों के अनुसार, अभी भी काफी काम बाकी है। यह एक्सप्रेस-वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा और राज्य के आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगा।

इस परियोजना का शिलान्यास 18 दिसंबर 2021 को प्रयागराज के जूडापुर दांदू गांव से मेरठ तक के लिए किया गया था। मुख्य सड़क का निर्माण कार्य भले ही तेजी से आगे बढ़ा हो, लेकिन प्रयागराज और प्रतापगढ़ जैसे जनपदों में एप्रोच मार्ग और फिनिशिंग का कार्य अभी भी अधूरा है। रेलिंग, साइनेज बोर्ड और पेंटिंग जैसे कार्य भी शुरूआती दौर में हैं। कई स्थानों पर रैंप और टोल प्लाजा का निर्माण भी पूरा नहीं हो सका है।

परियोजना के निर्माण में जुटी उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) के अधिकारी हालांकि दावा कर रहे हैं कि कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। उनके अनुसार, इस एक्सप्रेस-वे के चालू होने से प्रयागराज से मेरठ की 594 किलोमीटर की दूरी मात्र छह घंटे में तय की जा सकेगी, जबकि वर्तमान में यह यात्रा 10 से 12 घंटे या उससे अधिक समय लेती है। इस परियोजना की कुल लागत 36,230 करोड़ रुपये है।

यह छह-लेन का एक्सेस-नियंत्रित एक्सप्रेस-वे, जिसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को जोड़ेगा। इसके निर्माण से न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यह पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच आर्थिक और सामाजिक संपर्क को भी मजबूत करेगा।

गंगा एक्सप्रेस-वे के निर्माण से प्रभावित होने वाले 300 गांवों की तस्वीर बदलने की उम्मीद है। इसके दोनों ओर औद्योगिक गलियारे विकसित किए जाएंगे, जिससे कृषि, वाणिज्य, पर्यटन और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां, कोल्ड स्टोरेज, मंडियां और दुग्ध उद्योग जैसे व्यवसाय यहां स्थापित होंगे, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

पर्यावरण के अनुकूल इस परियोजना के किनारों पर छायादार और फलदार पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही, बिजली आपूर्ति के लिए सोलर पावर प्लांट भी स्थापित किए जाएंगे। राज्य की अब तक की सबसे लंबी और महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना के रूप में, गंगा एक्सप्रेस-वे प्रदेश के सड़क परिवहन को सुदृढ़ करेगा और उन क्षेत्रों को मुख्यधारा के परिवहन नेटवर्क से जोड़ेगा जो पहले उपेक्षित थे।

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