गीडा: 36 वर्षों में औद्योगिक क्रांति, अब नोएडा को दे रहा टक्कर
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने अपने 36 वर्षों के सफर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया है। 1989 में स्थापित, गीडा ने धीरे-धीरे अपनी पहचान बनाई और आज राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्र के रूप में उभरा है।nnविशेष रूप से 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद, गीडा के विकास को नई गति मिली है। इस अवधि में, वरुण वेबरेज, अंकुर स्टील, केयान डिस्टिलरी, फ्लावर मिलें और तत्वा प्लास्टिक जैसे कई बड़े उद्योगों ने यहां अपनी इकाइयाँ स्थापित की हैं। गीडा का विस्तारीकरण अब केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्लास्टिक पार्क, गारमेंट पार्क, आईटी पार्क और लॉजिस्टिक पार्क जैसी आधुनिक सुविधाओं का भी विकास किया जा रहा है।nnयह विकास इस हद तक हो गया है कि अब गीडा राष्ट्रीय स्तर के बड़े औद्योगिक घरानों को आकर्षित कर रहा है। अंबानी और अडानी जैसे दिग्गज उद्योगपतियों ने यहां अपनी फैक्ट्रियाँ स्थापित करने में रुचि दिखाई है, जो गीडा के बढ़ते महत्व का प्रमाण है। कई अन्य बड़े उद्योगपतियों ने भी यहां निवेश की इच्छा जताई है।nnपूर्व में चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज, गोरखपुर के अध्यक्ष एसके अग्रवाल के अनुसार, “वर्ष 1983 में चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज की स्थापना के समय हम लोगों ने गोरखपुर को केंद्र में रखकर संपूर्ण पूर्वांचल के औद्योगिक विकास का संकल्प लिया था।” उन्होंने बताया कि 1984 में सहजनवा को औद्योगिक विकास केंद्र घोषित किया गया और 1989 में प्रदेश सरकार द्वारा नोएडा की तर्ज पर गीडा का गठन किया गया, जिसकी वास्तविक शुरुआत 1991 में हुई।nnवर्तमान अध्यक्ष आरएन सिंह के अनुसार, “गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे ने कनेक्टिविटी को बढ़ाया है, जिससे यह क्षेत्र निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि 6,800 एकड़ से अधिक में फैले धुरियापार नए औद्योगिक टाउनशिप के विकास से भविष्य के विकास की नींव रखी गई है। अडानी ग्रुप, रिलायंस और कोका-कोला जैसी प्रमुख कंपनियों ने यहां निवेश प्रस्ताव दिए हैं।nnगीडा की यह प्रगति इसे नोएडा जैसे स्थापित औद्योगिक क्षेत्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में ला खड़ी हुई है। इस अभूतपूर्व विकास ने न केवल औद्योगिक परिदृश्य को बदला है, बल्कि हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली है और यह भारत में अपना प्रमुख स्थान बना रहा है।”
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