गेहूं बीज की खेती से पूर्वी चंपारण के किसान होंगे मालामाल, 30% अधिक दाम का भरोसा
पूर्वी चंपारण, बिहार: किसानों की आय में वृद्धि और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सरकार और कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही पहलें अब रंग ला रही हैं। इसी कड़ी में, पूर्वी चंपारण जिले के किसानों को गेहूं की सामान्य खेती के बजाय उसके बीज की खेती का विशेष हुनर सिखाया जा रहा है। इस नई पहल का उद्देश्य किसानों को न केवल अधिक मुनाफा दिलाना है, बल्कि राज्य को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना भी है।
मौसम के अनुकूल और उन्नत किस्म के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करना कृषि उत्पादन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कई बार किसानों को सही समय पर सही गुणवत्ता वाले बीज नहीं मिल पाते, जिसका सीधा असर फसल की पैदावार और गुणवत्ता पर पड़ता है। कीटों के प्रकोप से बचाव भी एक बड़ी चुनौती होती है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए, जिले में स्थानीय स्तर पर गेहूं के प्रमाणित बीज उत्पादन को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है।
रबी सीजन 2024-25 के लिए, बिहार के 21 जिलों में पूर्वी चंपारण का भी चयन प्रमाणित गेहूं बीज उत्पादन के लिए किया गया है। जिले के चयनित प्रखंडों और पंचायतों के इच्छुक किसान अब गेहूं की सामान्य खेती छोड़कर बीज उत्पादन का विकल्प चुन सकेंगे। इस योजना के तहत, किसानों को कई तरह की सरकारी सहायता प्रदान की जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण लाभ यह है कि उनके द्वारा उत्पादित गेहूं के बीज न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 30 प्रतिशत अधिक कीमत पर खरीदे जाएंगे।
इस योजना के दो प्रमुख लाभ हैं। पहला, किसानों को बीज उत्पादन पर गेहूं की सामान्य खेती की तुलना में अधिक मुनाफा मिलेगा। दूसरा, स्थानीय जलवायु के अनुकूल उच्च गुणवत्ता वाले बीज अगले सीजन के लिए किसानों को आसानी से उपलब्ध हो सकेंगे। कृषि विज्ञान केंद्र, पीपराकोठी में चयनित किसानों को बीज उत्पादन की एक दिवसीय प्रशिक्षण भी दिया गया है, जिससे वे खेती के साथ-साथ बीज उत्पादन में भी निपुण हो सकें।
मुख्यमंत्री तीव्र बीज विस्तार योजना के तहत, इच्छुक किसानों को प्रति किसान एक हेक्टेयर के लिए 100 किलोग्राम उन्नत किस्म का गेहूं बीज मुफ्त में उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए जिले में 524 एकड़ भूमि में उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए आवश्यक 524 क्विंटल बीज में से 450 क्विंटल बीज प्राप्त हो चुका है और उसका वितरण भी शुरू कर दिया गया है। किसानों को बीज बुआई से पहले उपचारित करने और कटाई के समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
जानकार बताते हैं कि यदि यह योजना सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार न केवल बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि अन्य राज्यों को भी बीज उपलब्ध कराने में सक्षम होगा। प्रमाणित गेहूं बीज को बढ़ावा देने के लिए, किसानों को बिहार राज्य बीज निगम के माध्यम से 80 प्रतिशत सब्सिडी पर आधार बीज भी उपलब्ध कराया जा रहा है। निगम किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य से 25 से 30 प्रतिशत अधिक मूल्य पर 100 प्रतिशत बीज की खरीद सुनिश्चित करेगा। यह पहल पूर्वी चंपारण के किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का नया द्वार खोलेगी।
