0

गाजियाबाद: नाबालिगों की जानलेवा रफ्तार, अभिभावकों की लापरवाही पड़ रही भारी

By Nov 13, 2025

जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। गाजियाबाद में नाबालिगों की बेकाबू रफ्तार और सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी जानलेवा साबित हो रही है। मंगलवार देर रात एनएच-9 पर हुआ एक दर्दनाक हादसा एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया है कि आखिर अभिभावक इतनी कम उम्र में अपने बच्चों के हाथों में वाहन की चाबी क्यों थमा देते हैं। इस भीषण दुर्घटना में बाइक सवार तीन नाबालिगों की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, यह हृदय विदारक घटना तब हुई जब एक 12 वर्षीय लड़का तेज रफ्तार में बाइक चला रहा था और उसके पीछे दो अन्य दोस्त बैठे थे। उनकी बाइक सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से इतनी जबरदस्त तरीके से टकराई कि तीनों किशोरों ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। यह हादसा न केवल लापरवाही का नतीजा है, बल्कि अभिभावकीय जिम्मेदारी की कमी का भी स्पष्ट आईना है। जब वाहन चलाने की वैधानिक आयु 18 वर्ष है, तब 12 साल के बच्चे के हाथ में बाइक कैसे पहुंची, यह गंभीर चिंता का विषय है।

पुलिस का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। बीते दो वर्षों में गाजियाबाद में 100 से अधिक वाहन स्वामियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जिन्होंने नाबालिगों को वाहन चलाने दिए। इसके बावजूद, सड़कों पर बिना हेलमेट और नियम तोड़ते किशोरों की संख्या कम नहीं हो रही है। अक्सर स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के बाहर ऐसे नजारे आम हैं।

ट्रैफिक पुलिस समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती है और प्रवर्तन कार्रवाई करती है, लेकिन अभिभावकों की मौन स्वीकृति और जागरूकता की कमी के चलते ऐसे हादसों पर लगाम लग पाना मुश्किल हो रहा है। नाबालिगों द्वारा वाहन चलाते पकड़े जाने पर 25 हजार रुपये का जुर्माना और वाहन मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाता है, जिसमें तीन माह तक की सजा का भी प्रावधान है।

एडीसीपी ट्रैफिक सच्चिदानंद ने इस संबंध में कहा, “अभिभावकों को यह समझना होगा कि वाहन की चाबी बच्चे के हाथ में देना, असल में उसकी जान को खतरे में डालना है।” उन्होंने जोर दिया कि पुलिस जागरूकता अभियान के साथ-साथ प्रवर्तन पर भी पूरा जोर दे रही है ताकि ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं को रोका जा सके। यह समय है जब अभिभावक अपनी जिम्मेदारी समझें और अपने बच्चों को असमय मौत के मुंह में जाने से बचाएं।

About

Journalist covering latest updates.

साझा करें