गाजियाबाद में पल्स पोलियो अभियान की बड़ी चूक, हजारों घर रहे दवा से वंचित
गाजियाबाद में पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों और कार्यान्वयन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में जिले के 80 से अधिक क्षेत्रों में हजारों घर ऐसे रहे जहाँ पोलियो की दवा बच्चों तक नहीं पहुंच सकी। यह लापरवाही स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है, खासकर तब जब केंद्र और प्रदेश सरकारें शिशु मृत्यु दर को कम करने और पल्स पोलियो जैसे महत्वपूर्ण अभियानों की सफलता के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक फील्ड रिपोर्ट ने इस लापरवाही को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2023 में 16 स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े 50 क्षेत्रों के 6003 घरों तक पोलियो अभियान की जिम्मेदारी निभाने वाली कोई टीम नहीं पहुंची। इसी तरह, दिसंबर 2024 में भी 16 स्वास्थ्य केंद्रों के 30 क्षेत्रों के 5144 घरों तक पोलियो टीम की पहुंच नहीं हो सकी। इन अनदेखे घरों को ‘मिस्ड रिकॉर्ड’ के रूप में दर्ज किया गया और बाद में इन क्षेत्रों में ‘रिपीट गतिविधि’ आयोजित की गईं, जिसमें अतिरिक्त व्यय हुआ। मई 2023 में आठ, दिसंबर 2023 में 26 और दिसंबर 2024 में 35 जगहों पर ऐसी अतिरिक्त गतिविधियां हुईं।
इस बीच, स्वास्थ्य विभाग ने जांच के आदेश दिए हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. अखिलेश मोहन ने बताया कि आगामी 14 दिसंबर से शुरू होने वाले पोलियो अभियान के लिए एक माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। इसके तहत 13.25 लाख घरों को कवर करने की योजना है, जिसमें 1649 बूथों पर 734509 बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाएगी। इसके लिए 2157 टीम, 137 ट्रांजिट टीम और 458 मोबाइल टीमों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस बार 80 क्षेत्रों में सुपरवाइजरों द्वारा विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि किसी भी बच्चे को दवा से वंचित न रहना पड़े। हालांकि, इस घटना ने अभियान की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है और अभिभावकों में चिंता का माहौल है।
