गैर-खाद्य वस्तुओं पर बढ़ा भारतीय परिवारों का खर्च, टिकाऊ सामानों की बढ़ी मांग
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) द्वारा जारी एक वर्किंग पेपर ने भारतीय परिवारों के खर्च के पैटर्न में एक महत्वपूर्ण बदलाव का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के परिवार अब अपने मासिक बजट का एक बड़ा हिस्सा गैर-खाद्य वस्तुओं पर खर्च कर रहे हैं, जिसमें उपभोक्ता वस्तुएं, सेवाएं और टिकाऊ सामान (कंज्यूमर ड्यूरेबल्स) प्रमुख हैं।
2011-12 से 2023-24 तक के घरेलू उपभोक्ता व्यय सर्वेक्षण के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए, वर्किंग पेपर में कहा गया है कि टिकाऊ सामानों पर प्रति व्यक्ति मासिक खर्च (एमपीसीई) में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दिलचस्प बात यह है कि कई राज्यों में ग्रामीण परिवारों ने इस मामले में शहरी परिवारों को पीछे छोड़ दिया है। वास्तविक मूल्य के लिहाज से, सभी राज्यों और क्षेत्रों में खर्च बढ़ा है, हालांकि शहरी परिवारों में यह वृद्धि अधिक देखी गई है।
वर्किंग पेपर में मोबाइल फोन के बढ़ते स्वामित्व पर भी प्रकाश डाला गया है। मोबाइल फोन अब लगभग सार्वभौमिक रूप से सुलभ हैं, जो देश की अधिकांश आबादी के लिए बेहतर संचार और आपसी जुड़ाव को दर्शाता है। सस्ती और तेज नेटवर्क कनेक्टिविटी के कारण मोबाइल फोन सूचना, मनोरंजन और संचार के लिए एक पसंदीदा उपकरण के रूप में उभरे हैं। इसके विपरीत, लैपटॉप और पीसी की वृद्धि धीमी बनी हुई है और इनका उपयोग अभी भी कुछ परिवारों तक सीमित है।
कई राज्यों में टीवी के स्वामित्व में गिरावट देखी गई है, जिसका एक मजबूत कारण सार्वभौमिक मोबाइल पहुंच को माना जा रहा है। टिकाऊ सामानों, जैसे कि परिवहन उपकरण और घरेलू उपकरण, पर खर्च को आर्थिक कल्याण और परिवारों के जीवन स्तर का एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इन सामानों का उपयोग परिवारों को भविष्य में भी लाभ पहुंचाता है, जिससे उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार होता है। यह प्रवृत्ति भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ती क्रय शक्ति और जीवन स्तर में सुधार की ओर इशारा करती है।
