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अलीगढ़ में पुनर्जीवित होंगी पांच विलुप्त नदियां, ‘नमामि गंगे’ योजना से जगी आस | Aligarh News

By Feb 19, 2026

अलीगढ़, उत्तर प्रदेश: गंगा-यमुना के दोआब में स्थित अलीगढ़ जिले में कभी दस प्रमुख नदियां बहती थीं, लेकिन समय के साथ प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण इनमें से पांच नदियां विलुप्त हो चुकी हैं। अब राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नमामि गंगे’ योजना और ‘एक जनपद एक नदी’ पहल के तहत इन विलुप्तप्राय नदियों को पुनर्जीवित करने की उम्मीद जगी है। इस कार्ययोजना के तहत सेंगर, करबन, सिरसा, रुतबा और काली नदी को फिर से जीवन देने का प्रयास किया जाएगा। अलीगढ़ खंड गंगा नहर ने इस दिशा में कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी है, जिससे क्षेत्र में जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।

ब्रिटिशकालीन अलीगढ़ गजेटियर के अनुसार, जिले में गंगा, यमुना, सेंगर, छोइया, नीम, रुतबा, सिरसा, बड़गंगा, रद और काली सहित दस नदियां प्रवाहित होती थीं। इनमें से गंगा, यमुना और काली को छोड़कर शेष नदियां अब लगभग विलुप्त हो चुकी हैं। इन नदियों के सूखने का मुख्य कारण बढ़ता प्रदूषण और नदी के किनारों पर बढ़ता अतिक्रमण रहा है। अब पूरे प्रदेश में नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए एक व्यापक कार्ययोजना बनाई गई है, जिसमें विभिन्न विभागों को शामिल किया गया है।

सिंचाई और जल संसाधन विभाग नदियों की डीसिल्टेशन, चैनेलाइजेशन, कोर्स करेक्शन और पर्याप्त जल उपलब्धता सुनिश्चित करने पर कार्य करेगा। इसके लिए अलीगढ़ खंड गंगा नहर के अधिशासी अभियंता ने ड्रेनेज खंड और नरौरा खंड निचली गंगा नहर से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

नदियों का ऐतिहासिक महत्व और वर्तमान स्थिति
पर्यावरणविद् सुबोध नंदन शर्मा बताते हैं कि कभी अलीगढ़ ही नहीं, बल्कि इटावा, मैनपुरी और कानपुर तक के लोग ईशन (जो बाद में सेंगर कहलाई) नदी के मीठे पानी से अपनी प्यास बुझाते थे। सेंगर नदी का इतिहास काफी पुराना है और इसका नाम पहले वाशिंद नदी था, जो पृथ्वीराज चौहान के समय की मानी जाती है। यह पनैठी से निकलकर अधौन गांव के पास बहती थी।

नीम नदी बुलंदशहर से अलीगढ़ की अतरौली तहसील के मलहपुर गांव से प्रवेश करती थी और लगभग 40 किलोमीटर तक जिले में बहती थी। 20 साल पहले इसके पानी से 25 से अधिक गांवों के लोगों को लाभ मिलता था, लेकिन अब इसकी जमीन पर भी कब्जे हो चुके हैं।

करबन नदी बुलंदशहर के खुर्जा से निकलकर अलीगढ़ के गभाना-खैर क्षेत्र में प्रवेश करती है। यह जिले की सबसे लंबी नदियों में से एक है, जिसकी लंबाई लगभग 70 किलोमीटर है। इगलास, खैर, सादाबाद और चंडौस जैसे कई कस्बे इसके किनारे बसे थे। अब इसमें केवल बारिश के समय ही पानी दिखाई देता है और कई जगहों पर खुले नाले इसे दूषित कर रहे हैं।

काली नदी, जो मुजफ्फरनगर के खतौली से हापुड़ और बुलंदशहर के रास्ते अलीगढ़ पहुंचती है, वर्तमान में अत्यधिक प्रदूषित है। इसके पानी में ऑक्सीजन का स्तर शून्य पर पहुंच चुका है, जिससे लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

पर्यावरणविदों का मानना है कि नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए शहरों के सीवर और नालों के पानी को सीधे नदियों में जाने से रोकना होगा। इसके लिए गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट से साफ करना अनिवार्य है। यह पहल न केवल नदियों को नया जीवन देगी बल्कि अलीगढ़ के पर्यावरण और जल सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण साबित होगी।

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