नवजात शिशु के लिए पहला मिनट अहम, UP में डॉक्टरों को मिला newborn care प्रशिक्षण
नवजात शिशु के जन्म के बाद का पहला मिनट उसके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद यदि किसी शिशु को सांस लेने में परेशानी होती है, तो प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी समय पर पुनर्जीवन देकर उसकी जान बचा सकते हैं। यह जानकारी लखनऊ बाल रोग अकादमी द्वारा आयोजित नेशनल रीससिटेशन प्रोग्राम (NRP) के दौरान दी गई। कार्यक्रम में बताया गया कि लगभग 15 प्रतिशत नवजात शिशुओं को जन्म के बाद चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता होती है।
लखनऊ बाल रोग अकादमी ने भारत में बाल एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम के मुख्य प्रशिक्षकों ने बताया कि कार्यशाला में प्रतिभागियों को कृत्रिम वातावरण में पुतलों (मैनिकिन) पर नवजात पुनर्जीवन की प्रक्रिया सिखाई गई। बार-बार अभ्यास के माध्यम से दक्षता विकसित की गई, जिसका मूल्यांकन अनुभवी प्रशिक्षकों ने किया।
इस कार्यशाला में लखनऊ, बाराबंकी, सीतापुर और अमेठी सहित विभिन्न जिलों से 45 से अधिक बाल रोग विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम नवजात शिशु के जीवन की रक्षा के लिए डॉक्टरों को आवश्यक कौशल प्रदान करते हैं, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
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