तलाक के बढ़ते मामलों से तंग आकर मंदिर ने शादियों पर लगाई रोक; पुजारी कोर्ट में, मंदिर में नहीं
बेंगलुरु के सबसे पुराने मंदिरों में से एक, सोमेश्वर स्वामी मंदिर ने पिछले कुछ सालों से शादियों की मेजबानी बंद कर दी है। चोल काल के इस मंदिर में सैकड़ों सालों से शादियां होती आ रही थीं, लेकिन पिछले छह-सात सालों से यह परंपरा रुक गई है। भक्तों के बीच इस बात को लेकर भ्रम था कि मंदिर ने शादियों की अनुमति क्यों बंद कर दी, जबकि हजारों जोड़ों ने यहीं पर सात फेरे लिए थे।
मंदिर प्रशासन ने हाल ही में खुलासा किया कि तलाक के मामलों में अचानक वृद्धि के कारण यह फैसला लिया गया। मंदिर के पुजारी, जो विवाह के गवाह के रूप में कार्य करते थे, उन्हें विवादित जोड़ों के कारण अदालतों के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर प्रशासन का यह निर्णय बढ़ते कानूनी विवादों से बचने के उद्देश्य से लिया गया था। यह चोल-युग का मंदिर उलसूर (Halasuru) के नाम से भी प्रसिद्ध है।
12वीं शताब्दी का यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और लंबे समय से हिंदू शादियों के लिए एक पवित्र स्थल रहा है। मंदिर के गोपुरम के नीचे सैकड़ों जोड़े हर साल शादी के बंधन में बंधते थे। पुजारी वैदिक परंपराओं के अनुसार अनुष्ठान करते थे, लेकिन हाल के वर्षों में तलाक के मामलों में वृद्धि के कारण इन विवाहों की पवित्रता पर सवाल उठने लगे।
मंदिर के अधिकारियों ने बताया कि पिछले दो वर्षों में ही तलाक से संबंधित 50 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जबकि एक दशक पहले यह संख्या सालाना पांच से भी कम थी। मंदिर समिति के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी वी गोविंदराजू ने बताया कि कई जोड़े घर से भागकर शादी कर लेते हैं और फर्जी दस्तावेज पेश करते हैं। कुछ दिनों बाद उनके माता-पिता आते हैं और कई बार कोर्ट केस दर्ज हो जाते हैं। मंदिर अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी घटनाओं से मंदिर की छवि पर असर पड़ सकता है।
इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ भक्तों ने मंदिर की छवि की रक्षा करने और पुजारियों के समय को बचाने के लिए इस कदम की सराहना की है, जबकि अन्य ने इसे एक अतिरंजित प्रतिक्रिया बताया है जो सांस्कृतिक प्रथाओं को कमजोर करती है।
