दहेज के खिलाफ मिसाल: सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में दूल्हों ने लौटाए लाखों रुपये, कहा- ‘दहेज एक कुप्रथा’
दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के मकसद से हरियाणा से बरात लेकर सहारनपुर पहुंचे दूल्हे प्रदीप राणा ने शगुन में मिले पांच लाख रुपये लौटा दिए। दूल्हे के इस फैसले की क्षेत्र में प्रशंसा हो रही है। दूसरी ओर मुजफ्फरनगर में बरात लेकर पहुंचे दूल्हे ने भी दहेज में दी जा रही 3.5 लाख की धनराशि को लेने से इन्कार कर दिया और हाथ जोड़कर विनम्रता से बोला, वह दहेज के खिलाफ है।
सहारनपुर के गांव मियानगी निवासी तरसेम राणा की बेटी अन्नु का रिश्ता हरियाणा के कैथल जिले के फरल गांव निवासी प्रदीप राणा से तय हुआ था। रविवार शाम प्रदीप बरात लेकर पहुंचे। लड़की पक्ष ने बरात का स्वागत करने के बाद दूल्हे का टीका करते हुए शगुन में पांच लाख रुपये दिए। बीटेक की पढ़ाई कर एनआरआइ बने दूल्हे प्रदीप ने शगुन में मिली पूरी रकम लौटा दी और शगुन के रूप में एक रुपया स्वीकार किया। प्रदीप ने कहा कि दहेज को सामाजिक कुरीति मानते हुए युवा पीढ़ी को इस कुप्रथा खत्म करने के लिए आगे आना चाहिए। प्रदीप आस्ट्रेलिया में एक कंपनी में साफ्टवेयर इंजीनियर हैं। दुल्हन अन्नु ने कहा कि अच्छी सोच वाला सज्जन परिवार यदि सभी दुल्हन को मिल जाए तो दहेज प्रथा पर अंकुश अंकुश लग जाएगा।
दूसरी ओर सहारनपुर के गांव संभलहेड़ी निवासी प्रवीण कुमार का रिश्ता मुजफ्फरनगर के गांव बुड्ढाखेड़ा निवासी राजकुमार की पुत्री रश्मि से तय हुआ। रविवार रात गांव में ही विवाह समारोह संपन्न हुआ। तिलक की रस्म के दौरान वधू पक्ष द्वारा साढ़े तीन लाख रुपये दिए गए, लेकिन दूल्हे प्रवीण ने हाथ जोड़कर कहा कि रुपये नहीं चाहिए। रिश्तों में कड़वाहट घोलने वाली दहेज प्रथा बंद होनी चाहिए। दुल्हन रश्मि भी मानती हैं कि मां-बाप अपनी बेटियों को पढ़ाते हैं, बाद में उसकी शादी के लिए पूरे जीवन की कमाई लगा देते हैं। दहेज प्रथा पूरी तरह खत्म होनी चाहिए।
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