एटा का पटना पक्षी विहार बना UP Ramsar Site, मिलेगा अंतरराष्ट्रीय पहचान और पर्यटन को बढ़ावा
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में स्थित पटना पक्षी विहार को अब अंतरराष्ट्रीय महत्व की रामसर साइट का दर्जा मिल गया है। यह उपलब्धि प्रदेश के पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। लगभग दो वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार ने इस संबंध में केंद्र को प्रस्ताव भेजा था, जिसे सभी आवश्यक औपचारिकताओं के बाद स्वीकृति मिल गई है। इस घोषणा से यह आर्द्रभूमि अब वैश्विक संरक्षण सूची में शामिल हो गई है, जिससे यहां जैव विविधता, शोध और पर्यावरण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। यह दर्जा मिलने से एटा जनपद को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
रामसर साइट का महत्व
रामसर साइट का नाम ईरान के शहर रामसर के नाम पर पड़ा है, जहां 2 फरवरी 1971 को आर्द्रभूमियों के संरक्षण को लेकर एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में विश्व की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों को संरक्षित करने के लिए एक संधि पारित की गई, जिसे ‘रामसर कन्वेंशन’ कहा जाता है। भारत सहित करीब 172 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किए हैं। रामसर साइट के अंतर्गत उन आर्द्रभूमियों को शामिल किया जाता है, जहां जल स्रोत स्थायी या मौसमी रूप से मौजूद हो, जैव विविधता समृद्ध हो और जो पक्षियों व अन्य जीवों का प्राकृतिक आवास हों। इन स्थलों के संरक्षण और प्रबंधन की जिम्मेदारी संबंधित राज्य व देश की सरकारों पर होती है।
पटना पक्षी विहार की पहचान
वर्ष 1991 में स्थापित पटना पक्षी विहार लगभग 108 हेक्टेयर (करीब 270 एकड़) क्षेत्र में फैला है और इसे उत्तर प्रदेश का सबसे छोटा पक्षी विहार माना जाता है। यहां की लेंटिक (स्थिर जल) झील हर वर्ष सर्दियों में हजारों प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती है। यहां 300 से अधिक पक्षी प्रजातियां दर्ज की गई हैं, जिनमें लगभग 160 प्रजातियां प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की हैं। सर्दियों में साइबेरिया और यूरोप के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले मेहमान परिंदे यहां डेरा डालते हैं, जिससे झील का दृश्य मनमोहक हो जाता है। वन विभाग समय-समय पर सफाई अभियान चलाकर जल प्रवाह को संतुलित करता है, ताकि पक्षियों के लिए अनुकूल वातावरण बना रहे।
क्षेत्रीय विकास और नए अवसर
पटना पक्षी विहार को UP Ramsar Site का दर्जा मिलने से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं में सुधार होगा। स्थानीय लोगों के लिए गाइड के रूप में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे, खासकर युवाओं और छात्रों के लिए। शैक्षिक विकास भी होगा, क्योंकि उच्च शिक्षण संस्थानों को उच्च स्तरीय बनाया जाएगा ताकि विश्वविद्यालय और वैज्ञानिक यहां शोध कर सकें। इसके अलावा, एटा के प्रसिद्ध ओडीओपी उत्पाद, घुंघरू और घंटे उद्योग को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। जल संरक्षण बेहतर होगा, जिससे भूजल स्तर सुधरेगा और किसानों को सिंचाई में मदद मिलेगी। यह उपलब्धि पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
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