दिल्ली की सड़कों पर दशकों से अतिक्रमण: भीषण जाम से जूझते लोग, प्रशासन की भूमिका पर सवाल
हाल ही में तुर्कमान गेट इलाके में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुए बवाल ने पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली में फैले अतिक्रमण के गंभीर मुद्दे को एक बार फिर उजागर कर दिया है। यह समस्या सिर्फ एक इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि पुरानी दिल्ली सहित आसपास के 16 प्रमुख मार्गों पर दशकों से अवैध कब्जे के कारण आम जनता को रोज भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इन सड़कों पर अतिक्रमण का हाल इतना बदतर है कि वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल चलने वालों के लिए भी सड़क से गुजरना मुश्किल हो गया है।
पुलिस और प्रशासन की कथित मिलीभगत के चलते सड़क के दोनों ओर रेहड़ी-पटरी वालों, दुकानदारों और अस्थायी ढांचों ने स्थायी रूप से कब्जा जमा लिया है। इससे सड़कों की चौड़ाई सिकुड़कर आधी से भी कम रह गई है, जिसके परिणामस्वरूप सामान्य दिनों में कुछ ही मिनटों में तय होने वाला सफर अब घंटों जाम में फंसने में बदल गया है। इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित स्कूली बच्चे, कार्यालय जाने वाले कर्मचारी, बुजुर्ग और मरीज हो रहे हैं, क्योंकि कई बार तो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस भी जाम में फंस जाती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अतिक्रमणकारियों को न तो पुलिस का डर है और न ही नगर निगम का। प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत के कारण ही अतिक्रमण फल-फूल रहा है। नगर निगम द्वारा समय-समय पर की जाने वाली कार्रवाई केवल खानापूर्ति साबित होती है, क्योंकि कुछ दिनों बाद हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं। दशकों से इन सड़कों पर कब्जा जमाए हुए लोगों पर कार्रवाई के लिए पुलिस प्रशासन की सख्ती की मांग की जा रही है।
विभिन्न सड़कों पर अतिक्रमण के कारण यातायात जाम की स्थिति गंभीर बनी हुई है। कहीं गोवंशियों का जमावड़ा, कहीं अवैध पार्किंग और रेहड़ी-पटरी वालों का कब्जा, तो कहीं बिल्डिंग सामग्री के ढेर लगे हैं। ई-रिक्शा, मैकेनिकों और दुकानदारों द्वारा सड़क घेरने से भी समस्या बढ़ गई है। नगर निगम की पार्किंग में क्षमता से अधिक वाहन खड़े होने और अनाज मंडी में ट्रकों की लोडिंग-अनलोडिंग के कारण भी जाम लगता है, जिससे लोगों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
