12 साल बाद हो रहा UP BJP अध्यक्ष का चुनाव, 45 साल के इतिहास में कभी नहीं पड़ी वोटिंग की नौबत
भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष कार्यालय
शोभित श्रीवास्तव, जागरण, लखनऊ : प्रदेश में 12 वर्षों बाद भारतीय जनता पार्टी प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव होने जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2013 में चुनाव हुआ था, हालांकि उस समय भी लक्ष्मीकांत बाजपेयी का अकेला नामांकन हुआ था। यूं तो वह वर्ष 2012 में ही कार्यवाहक अध्यक्ष बन गए थे, किंतु एक वर्ष बाद हुए चुनाव के बाद वह नियमित अध्यक्ष बने थे। इसके बाद के चारों प्रदेश अध्यक्ष नामित किए गए। अब 17वें प्रदेश अध्यक्ष के लिए चुनाव शनिवार व रविवार को होने जा रहा है।
वर्ष 2012 के विधान सभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के बाद सूर्य प्रताप शाही ने प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसी के बाद लक्ष्मीकांत बाजपेयी को पहले कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया फिर चुनाव कर दोबारा अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई। इससे पहले वर्ष 2000 में जब कलराज मिश्र को दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाना था तब रामप्रकाश त्रिपाठी ने चुनौती देते हुए अपना नामांकन पत्र भर दिया था। मान मनौव्वल के बाद भी त्रिपाठी नहीं माने तो बाद में उस समय के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को फोन कर उनसे नामांकन वापस कराया था। इसके बाद कलराज मिश्र निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए थे।
वर्ष 1980 में भाजपा के गठन के बाद पहले प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव में माधव प्रसाद त्रिपाठी के नाम पर कल्याण सिंह राजी नहीं थे। उन्होंने नामांकन पत्र दाखिल करके हलचल बढ़ा दी थी। मतदान टालने के लिए तत्कालीन प्रभारी सुंदर सिंह भंडारी ने दबाव बनाकर कल्याण सिंह को मैदान से हटने के लिए तैयार किया था। भाजपा के 45 वर्षों के इतिहास में आज तक मतदान की नौबत कभी नहीं आई। इतिहास को देखते हुए यह माना जा रहा है कि इस बार भी मतदान की नौबत नहीं आएगी।
