ED की 17 घंटे चली छापेमारी: मेडिकल कॉलेज की मान्यता पर गहराया विवाद
खगड़िया नगर परिषद क्षेत्र के परमानंदपुर स्थित श्यामलाल चंद्रशेखर मेडिकल कॉलेज में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने शुक्रवार की सुबह 10 बजे से शनिवार की अल सुबह 3 बजे तक, लगभग 17 घंटे तक एक बड़ी छापेमारी की। इस दौरान ईडी की टीम ने कॉलेज के व्यवस्थापक इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार से पूछताछ की और कुछ हार्ड डिस्क अपने साथ ले गई।
इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए शनिवार को कॉलेज प्रशासन ने एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित किया। कॉलेज के व्यवस्थापक इंजीनियर धर्मेंद्र कुमार, मीडिया प्रभारी अमरीष कुमार और रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रफुल्ल चंद्र घोष ने संयुक्त रूप से कहा कि ईडी की यह छापेमारी दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वे संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन इस छापेमारी का कारण उनके लिए एक अबूझ पहेली बना हुआ है।
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने 28 जून 2024 को कॉलेज का निरीक्षण किया था, लेकिन मान्यता प्रदान नहीं की थी। इस पर कॉलेज प्रशासन ने पटना उच्च न्यायालय का रुख किया, जहां न्यायाधीश ने 20 दिनों के भीतर पूर्ण निरीक्षण कर मान्यता देने का आदेश दिया था। एनएमसी ने इस आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी।
इसी बीच, 24 जून 2025 को एनएमसी ने एक औचक निरीक्षण किया, जिसमें कॉलेज में कोई बड़ी कमी नहीं पाई गई। इसके बावजूद, छत्तीसगढ़ के रायपुर में सीबीआई ने एक प्राथमिकी दर्ज की। प्रशासन का दावा है कि इस प्राथमिकी में न तो कॉलेज को अभियुक्त बनाया गया है और न ही कोई नोटिस दी गई है। प्राथमिकी में केवल इतना लिखा गया है कि कुछ अज्ञात एनएमसी अधिकारी संपर्क करने का प्रयास कर रहे थे।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद कि तीन दिनों के भीतर मान्यता पर निर्णय जारी किया जाए, एनएमसी ने कॉलेज के नाम का सीबीआई प्राथमिकी में उल्लेख होने का हवाला देते हुए मान्यता प्रक्रिया पर रोक लगा दी। कॉलेज प्रशासन ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बिना किसी आरोप के कॉलेज का नाम एक प्राथमिकी में आने मात्र से उनकी मान्यता प्रक्रिया बाधित हो रही है, जो कि अनुचित है।
