बिजली चोरी पर सीधी नजर, बॉडी वॉर्न कैमरे से होगी जांच
बिजली चोरी पर अंकुश लगाने और जांच प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए अब छापेमारी के दौरान बॉडी वॉर्न कैमरा अनिवार्य कर दिया गया है। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन ने विजिलेंस और विभागीय जांच टीमों के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इसके तहत घर या व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जांच या छापेमारी के दौरान टीम के सदस्यों को बॉडी वॉर्न कैमरा पहनना अनिवार्य होगा और पूरी कार्रवाई रिकॉर्ड की जाएगी। विभाग को ये कैमरे उपलब्ध करा दिए गए हैं।
प्रबंधन के निर्देशानुसार कार्यालय से रवाना होने के साथ ही जांच और छापेमारी से जुड़ी प्रत्येक गतिविधि कैमरे में कैद की जाएगी। टीम के परिसर में प्रवेश, मीटर और कनेक्शन की जांच, मौके पर की गई कार्रवाई और वापसी तक का पूरा विवरण रिकॉर्ड में रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य बिजली चोरी की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई करने के साथ उपभोक्ताओं और विभाग दोनों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करना है।
एसओपी में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी कारणवश बॉडी वॉर्न कैमरा ठीक से कार्य नहीं करता है तो उस स्थिति में जांच या छापेमारी की कार्रवाई नहीं की जाएगी। इससे जांच के दौरान मनमानी, विवाद और आरोप-प्रत्यारोप की गुंजाइश कम होगी। कैमरे के माध्यम से छापेमारी की पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।
विद्युत वितरण कंपनियों में लागू इस व्यवस्था के तहत चेकिंग टीम के प्रभारी का यह दायित्व होगा कि कार्यालय से निकलते समय बॉडी वॉर्न कैमरे को सक्रिय कर टीम के सदस्यों का परिचय, तैनाती और कार्रवाई का विवरण रिकॉर्ड करें। विजिलेंस टीम के साथ छापेमारी के दौरान कैमरे पर निरीक्षक तैनात रहेगा, जबकि विभागीय टीम होने पर संबंधित अधिकारी कैमरा धारण करेगा।
चीफ इंजीनियर पंकज अग्रवाल ने बताया कि विभाग को बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध हो चुके हैं। इनके उपयोग से बिजली चोरी रोकने में मदद मिलेगी और जांच प्रक्रिया पर लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा। पारदर्शिता बढ़ने से ईमानदार उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, वहीं दोषियों के खिलाफ ठोस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आसान होगी।
