धर्मनगरी मथुरा में शराब ठेकों पर रोक की मांग तेज, ब्रजवासी बोले – पवित्र भूमि पर नशे का स्थान नहीं
संपूर्ण ब्रज क्षेत्र में शराब के ठेकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग ने एक बार फिर ज़ोर पकड़ लिया है। ब्रजवासियों, संत-समाज, सामाजिक संगठनों और स्थानीय व्यापारियों ने एक सुर में कहा है कि पवित्र ब्रजभूमि में शराब के किसी भी प्रकार के ठेके की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। लोगों का स्पष्ट मानना है कि ब्रज की धार्मिक और आध्यात्मिक महत्ता विश्वभर में विख्यात है, और ऐसे में मदिरा की बिक्री इस गरिमापूर्ण पहचान के सर्वथा विरुद्ध है।
स्थानीय निवासियों ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वृंदावन जैसे पवित्र शहर, जहाँ प्रतिदिन हजारों-लाखों श्रद्धालु, पर्यटक और तीर्थयात्री दर्शन के लिए आते हैं, वहां से थोड़ी दूरी पर भी किसी भी प्रकार का शराब ठेका होना पवित्रता के खिलाफ है। मंदिरों, आश्रमों और आध्यात्मिक साधना स्थलों से भरे इस क्षेत्र में शराब की उपलब्धता न केवल वातावरण को दूषित करती है, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं को भी आहत करती है। मांग है कि वृंदावन की सीमा प्रारंभ होने पर खुले शराब के ठेकों व दुकानों को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए। ब्रज की धार्मिक महत्ता को देखते हुए जल्द से जल्द ब्रजमंडल के सभी शराब ठेकों को बंद किया जाना चाहिए।
ब्रजवासियों ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस संवेदनशीलता को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेगी, ताकि ब्रज की पवित्रता बनी रहे। वहीं, कई संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने ठेकों को बंद करने का फैसला जल्द नहीं लिया, तो पूरे ब्रज में व्यापक आंदोलन शुरू किया जा सकता है। वर्तमान में, अधिकांश ब्रजवासी, संत-महंत, धर्माचार्य, श्रद्धालु, पर्यटक और तीर्थयात्री ब्रज में मदिरा निषेध लागू कराने के पक्ष में हैं, ताकि आध्यात्मिक माहौल सुरक्षित रह सके।
लाखों श्रद्धालु और पर्यटकों ने सरकार से आग्रह किया है कि वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, राधाकुंड, गोकुल और अन्य धार्मिक स्थानों को शराब-मुक्त क्षेत्र घोषित किया जाए। उनका कहना है कि ब्रज की आध्यात्मिक परंपरा सदियों से पूरी दुनिया को प्रेरित करती आई है और इसे किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं पड़ने दिया जा सकता। बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी पूर्व में कई सार्वजनिक मंचों पर ब्रजमंडल से संत समाज के साथ शराब ठेकों को पूर्णतः हटाने की अपील की है। संतों और धर्माचार्यों का कहना है कि भले ही सरकार को शराब बिक्री से लाखों का राजस्व प्राप्त होता हो, लेकिन ब्रजभूमि जैसी पवित्र जगहों पर नशे का कोई स्थान नहीं है और इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
ब्रज के व्यापारियों और सामाजिक संस्थाओं ने भी धर्मनगरी में जल्द से जल्द शराब के ठेके बंद किए जाने की मांग को दोहराया है। ब्रजवासियों ने सरकार से सीधा सवाल पूछा है कि राजस्व बढ़ाने के नाम पर क्या धर्मनगरी की पहचान से समझौता करना उचित है? स्थानीय लोगों का मानना है कि शराब की खुली बिक्री के कारण ब्रज की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हो रही है। देश-विदेश से आने वाले भक्त अक्सर आश्चर्य व्यक्त करते हैं कि जिस भूमि पर भगवान कृष्ण ने लीलाएं कीं, वहां शराब की बिक्री कैसे जारी है? इस कारण से ब्रज का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वातावरण प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि तीर्थ क्षेत्र में शराब बिक्री से न केवल अपराध और विवाद बढ़ते हैं, बल्कि यह स्थानीय युवाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।
पंडित सुरेशचंद्र शर्मा ने कहा, “ब्रज की पवित्रता सर्वोपरि है। सरकार को समझना चाहिए कि वृंदावन जैसे तीर्थ क्षेत्रों में शराब के ठेके होना ब्रज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान के विपरीत है। श्रद्धालु और पर्यटकों के लिए यह स्थान भोग नहीं, बल्कि भक्ति और साधना का केंद्र है। ऐसे में इस पवित्रता क्षेत्र में शराब के ठेके बंद होने चाहिए।”
प्रेम बल्लभ शर्मा ने कहा, “सरकार को शराब के ठेकों को बंद करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए और ब्रज की आस्था और संस्कृति को बचाना चाहिए। शराब की खुली बिक्री से संपूर्ण विश्व में धर्मनगरी वृंदावन की छवि धूमिल हो रही है। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा शराब ठेका बंद कराने का जो आह्वान बृजवासियों से किया है, वह उन्हें सरकार से करना चाहिए था।”
