धीरेंद्र शास्त्री का आह्वान: पोस्टर बॉय नहीं, वैचारिक हिंदू राष्ट्र बनाना लक्ष्य
मथुरा। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने गुरुवार को कोसीकलां (मथुरा) में एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि उन्हें हिंदुत्व का पोस्टर बॉय बनने की कोई लालसा नहीं है, बल्कि उनका लक्ष्य वैचारिक हिंदू राष्ट्र की स्थापना करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक जागा हुआ हिंदू ही अपने परिवार, समाज और नेताओं को हिंदू विचारधारा से जोड़ सकता है, जिससे भारत स्वतः ही हिंदू राष्ट्र बन जाएगा।
सनातन हिंदू एकता पदयात्रा लेकर मथुरा सीमा में पहुंचे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत सनातनियों का देश था, है और रहेगा। उन्होंने हिंदुओं को एकजुट होने का आह्वान करते हुए चेतावनी दी कि यदि वे एकजुट नहीं हुए तो तनातनी की स्थिति में खड़े नहीं रह पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा केवल इसलिए की जा रही है ताकि हिंदुओं के जन्म, जंगल, जमीन, बच्चियां, बेटियां और रोटियां सुरक्षित रहें।
शास्त्री ने मुस्लिम समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने बच्चों को आतंकवादी नहीं, बल्कि पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जैसा बनने की शिक्षा दें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आतंकवाद की शिक्षा दी गई, तो वह दिन दूर नहीं जब उनकी पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा और उन्हें देश से भागना पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें कोई नहीं भगाएगा, बल्कि देश का संविधान, कानून और 100 करोड़ हिंदू उन्हें भगाएंगे।
उन्होंने कश्मीरी पंडितों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि हिंदू एकजुट नहीं हुए तो उनका भी यही हाल होगा, जहां संपत्ति और संतति लुट जाएगी और उन्हें भागना पड़ेगा। शास्त्री ने कहा कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, ईरान, इराक और मॉरीशस से हिंदू भागकर भारत आए हैं, लेकिन अब कोई ऐसा देश नहीं जो उनका स्वागत करेगा। इसलिए भारत को ही हिंदू राष्ट्र बनाना है। उन्होंने मठ-मंदिरों की सुरक्षा को व्यक्तिगत सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि यदि मठ-मंदिर सुरक्षित नहीं होंगे, तो कोई भी सुरक्षित नहीं रहेगा।
ब्रज क्षेत्र में शराब और मांस-मंदिरा की बढ़ती बिक्री पर चिंता व्यक्त करते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने ब्रजवासियों से आह्वान किया कि उन्हें इसकी शुरुआत स्वयं करनी होगी ताकि इस पवित्र भूमि की गरिमा बनी रहे। उन्होंने कहा कि उन्हें न नेता बनना है और न किसी को वोट दिलाना है, यह श्रम केवल सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए किया जा रहा है।
