नोटबंदी ने माओवादियों की कमर तोड़ी, 2016 के बाद से आज तक नहीं संभल पाए; समर्पण करने वालों ने किए बड़े खुलासे
2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी लागू किए जाने से माओवादियों को भारी नुकसान हुआ, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था को गहरा आघात पहुंचा। समर्पण करने वाले माओवादियों ने पुलिस पूछताछ में अपने वित्तीय नेटवर्क की परतें खोली हैं। उन्होंने स्वीकारा है कि नोटबंदी के बाद से आज तक उनकी वित्तीय स्थिति कभी नहीं संभल पाई।
बालाघाट पुलिस की सख्ती ने भी माओवादियों की जबरन वसूली पर अंकुश लगा दिया था। वे तेंदूपत्ता फड़ ठेकेदार या रोड निर्माण के ठेकेदारों से उगाही नहीं कर पाए। नतीजा यह हुआ कि संगठन में वित्तीय संकट गहराता गया। इसका प्रमाण यह है कि बालाघाट में समर्पण करने वाले 13 माओवादियों के पास नकदी नहीं मिली है।
दूसरी तरफ इन माओवादियों से पूछताछ और जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी) की चार सदस्यीय टीम बालाघाट पहुंच गई है। सूत्रों के अनुसार, माओवादियों ने नोटबंदी के समय बालाघाट के कई माओवाद प्रभावित गांवों के ग्रामीणों को 500 और 1000 रुपये के नोट बदलने के लिए दिए थे, लेकिन ये रकम ग्रामीणों ने वापस नहीं लौटाई। इससे माओवादियों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। उनके पास बचे नोट भी रद्दी साबित हो गए।
दूसरी चोट माओवादियों को तब लगी, जब 2023 में 2000 के नोट प्रचलन से वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की गई। आरबीआई के इस फैसले ने भी माओवादियों के वित्तीय ढांचे को पूरी तरह से हिला दिया। पूछताछ में यह भी पता चला कि बैरल ग्रेनेड लांचर (बीजीएल), सिंगल शाट गन जैसे हथियार माओवादी खुद बनाते थे। पुलिस बरामद किए गए सभी हथियारों के बट नंबर की जांच कर रही है।
