पीएम आवास योजना वेरिफिकेशन में देरी, जमुई के हजारों गरीब परिवारों पर संकट | PM Awas Yojana
जमुई के झाझा प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत चयनित परिवारों के पुनः सत्यापन कार्य में अपेक्षित गति नहीं मिल पा रही है। जनप्रतिनिधियों और चयनित परिवारों में इस धीमी प्रगति को लेकर भारी आक्रोश है, जबकि यह कार्य 15 जनवरी तक पूरा किया जाना था। अब तक 20 प्रतिशत कार्य भी पूरा नहीं हुआ है।
मनरेगा के रोजगार सेवकों की लापरवाही इस सत्यापन कार्य में सामने आ रही है। विशेष रूप से जामुखरैया पंचायत, जो प्रखंड के पिछड़े पंचायतों में से एक है, वहां पहली बार सबसे अधिक परिवारों को आवास योजना से जोड़ा गया था। हालांकि, वहां पुनः सत्यापन की जिम्मेदारी सौंपे जाने के बावजूद रोजगार सेवक ने अब तक कार्य शुरू नहीं किया है।
प्रखंड विकास पदाधिकारी सुनील कुमार चांद ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आधा दर्जन कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा है। पूरे प्रखंड में 30,225 परिवारों के आवास के लिए सर्वेक्षण किया गया था, जिसमें 4238 परिवारों ने स्वयं आवेदन भरा था। जामुखरैया पंचायत में सबसे अधिक 2252 परिवार चयनित हुए हैं, जबकि बाराकोला पंचायत में मात्र 557 परिवार ही योजना से जुड़ पाए हैं।
लगभग एक माह पहले 20 कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति की गई थी, जिनमें पंचायत सेवक, रोजगार सेवक, किसान सलाहकार, आवास पर्यवेक्षक, कर्मचारी और डाटा ऑपरेटर शामिल थे। इसके बावजूद, सत्यापन कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं हो सकी है।
जामुखरैया के मुखिया विकास कुमार सिंह ने कहा कि पंचायत पिछड़ा हुआ है और काफी प्रयास के बाद भूमिहीन व बेघर परिवारों को योजना से जोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि कर्मचारी सुस्त पड़े हैं और अब तक एक भी चयनित परिवार का सत्यापन नहीं हुआ है, जिससे कई परिवार योजना से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने जल्द सत्यापन कार्य पूरा करने की मांग की है।
प्रखंड विकास पदाधिकारी ने कहा कि कुछ रोजगार सेवक अपने कार्य के प्रति गंभीर नहीं हैं और उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है। कार्यक्रम पदाधिकारी को भी इस कार्य में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। कार्यक्रम पदाधिकारी सुशील कुमार ने बताया कि जामुखरैया पंचायत का कार्य महापुर पंचायत के रोजगार सेवक को दिया गया था, लेकिन दूरी अधिक होने के कारण वे समय पर वहां नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी स्थिति में उक्त पंचायत की जिम्मेदारी किसी अन्य कर्मचारी को दी जानी चाहिए।
इस देरी का सीधा असर हजारों गरीब परिवारों के सिर पर छत होने के सपने पर पड़ रहा है, जो सरकारी सहायता पर निर्भर हैं। सत्यापन प्रक्रिया पूरी न होने से इन परिवारों को समय पर आवास का लाभ नहीं मिल पाएगा, जिससे उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
