दुबई-कंबोडिया के साइबर गैंग का पर्दाफाश, आगरा से आठ गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के आगरा में ताजगंज क्षेत्र के एक होटल में संचालित हो रहे एक बड़े साइबर अपराध गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह दुबई और कंबोडिया में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर काम कर रहा था। पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार युवक भोले-भाले लोगों के बैंक खाते खुलवाकर उन्हें तत्काल साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे।nnपुलिस की गिरफ्त में आए आरोपियों के कब्जे से 42 एटीएम कार्ड, 11 चेक बुक, 9 मोबाइल फोन, 3,412 रुपये भारतीय मुद्रा, 215 रुपये नेपाली मुद्रा और एक कार बरामद की गई है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (एडीसीपी) आदित्य ने बताया कि पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे विशेष ऐप और व्हाट्सएप समूहों के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी को अंजाम देते थे। उनके पास ऐसे बैंक खाते होते थे जिनकी लेन-देन की सीमा लाखों-करोड़ों रुपये तक होती थी।nnगिरफ्तार आरोपियों में रनवीर खाते उपलब्ध कराने और दलालों को जोड़ने का काम करता था। वहीं, देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि उसने दुबई से यह तकनीक सीखी है और लंबे समय से इस धोखाधड़ी में सक्रिय है। गिरोह खाताधारकों से धोखे से किट प्राप्त कर खातों का दुरुपयोग करता था और खाता फ्रीज होते ही उसे बंद कर देता था।nnएडीसीपी आदित्य ने बताया कि रनवीर आगरा से खाते लेने आया था, उसके साथ चार अन्य लोग भी थे जो भागने में सफल रहे। इनकी पहचान वरुण, राहुल, जय और भीलवाड़ा निवासी एक अज्ञात व्यक्ति के रूप में हुई है। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है। बरामद 42 एटीएम में से 16 एटीएम आगरा के हैं। हाई वैल्यू खाते वे होते हैं जिनमें करोड़ों रुपये की लेन-देन पर बैंक कोई रोक-टोक नहीं लगाते, जिससे साइबर अपराधी बड़े अमाउंट को जल्दी ट्रांसफर कर सकें और पकड़े जाने से पहले पैसे कई खातों में घुमा सकें।nnगिरफ्तार किए गए आरोपियों में रनवीर भार्गव (दिल्ली), सौरभ चौधरी (अलीगढ़), अनुज (औरैया), राहुल कुमार (आगरा), देवेंद्र प्रताप सिंह (प्रयागराज), अजय कुमार (आगरा), ध्रुवनाथ प्रताप सिंह (फिरोजाबाद) और चिरंजीवी शर्मा (आगरा) शामिल हैं। देवेंद्र प्रताप मूल रूप से प्रयागराज का निवासी है और 2016 से दुबई में रह रहा था। कोरोना काल में लौटने के बाद उसकी पहचान साइबर ठगों से हुई और उसने ट्रेनिंग ली। वह हैंडलर के संपर्क में रहकर लोगों को 2 से 5 प्रतिशत कमीशन का लालच देकर हाई-वैल्यू खाते खुलवाता था।nnआरोपियों के मोबाइल से एक मशीन का वीडियो भी बरामद हुआ है, जिसमें कार्ड नंबर और ओटीपी डालकर चंद मिनटों में पैसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने का तरीका दिखाया गया है। इस तरह पीड़ित का खाता मिनटों में खाली हो जाता है और धनराशि को कई खातों में घुमाकर विदेशी हैंडलरों को भेज दिया जाता है। आरोपियों के पास मिले चेक बुक व एटीएम के अधिकांश खातों पर अन्य राज्यों में शिकायतें दर्ज हैं। रनवीर पर हरियाणा के जींद में मुकदमे दर्ज हैं और उसने एक वकील के साथ 34 लाख की धोखाधड़ी की थी। सौरभ पर भी चार मुकदमे दर्ज हैं।”
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