दुबई से सीखा साइबर ठगी का ‘गुर’, भारत लौटकर लाखों का लगाया चूना
दुबई में कॉल सेंटर में नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगी के गुर सीखने वाले एक गिरोह का पीलीभीत पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह एविएटर और रम्मी जैसे गेमिंग ऐप्स के जरिए लोगों को निशाना बनाता था। शुरुआत में छोटी-छोटी जीत दिखाकर उनका विश्वास जीता जाता था, जिसके बाद उनके बैंक खातों की जानकारी हासिल कर ली जाती थी और फिर एक झटके में सारे पैसे निकाल लिए जाते थे।
घुंघचाई थाना पुलिस ने इस गिरोह के सरगना अमृतपाल सिंह को उसके दो साथियों धर्मेंद्र कुमार और प्रियांशु दीक्षित के साथ गिरफ्तार किया है। पूछताछ में पता चला कि गौरव शर्मा नामक व्यक्ति के जनसेवा केंद्र को होल्ड करने के बाद पुलिस की जांच इस गिरोह तक पहुंची। गौरव शर्मा ने बताया कि अमृतपाल अवैध रूप से जनसेवा केंद्र चला रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस ने नौ मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 59,500 रुपये नकद, सात बैंक पासबुक, तीन चेकबुक, एक एटीएम, यूएई का एक पहचान पत्र, दुबई का एक सिम कार्ड और कई फर्जी आधार कार्ड की छायाप्रतियां बरामद की हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि धर्मेंद्र द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे बैंक खातों पर राजस्थान, ओडिशा, तमिलनाडु, बिहार, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से साइबर धोखाधड़ी के मामलों में पहले से ही रोक लगी हुई थी।
पुलिस अब इस गिरोह द्वारा देश के किन-किन राज्यों में और कितने लोगों को ठगा है, इसकी विस्तृत जांच कर रही है। एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और जब्त किए गए मोबाइल नंबरों, बैंक खातों और लैपटॉप से मिले विवरणों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है। थाना प्रभारी ने बताया कि अमृतपाल से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि उसने किन लोगों से खाते और सिम कार्ड खरीदे थे।
