दलजीत सिंह चौधरी का सेवाकाल: दस्यु उन्मूलन और आंतरिक सुरक्षा में अहम योगदान
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीहड़ों में कभी आतंक का पर्याय रहे दस्यु गिरोहों के खात्मे का श्रेय आईपीएस अधिकारी दलजीत सिंह चौधरी को जाता है। 1990 बैच के इस अधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान इटावा और कानपुर जैसे संवेदनशील इलाकों में दस्यु उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए, जिसने कुख्यात डकैतों के हौसले पस्त कर दिए। कई बार उन्होंने सीधे तौर पर खूंखार डकैतों का सामना किया और उन्हें आत्मसमर्पण करने पर विवश किया।
दलजीत सिंह चौधरी की बहादुरी और उत्कृष्ट सेवाओं को देखते हुए उन्हें वीरता के लिए चार बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। यह उनके असाधारण साहस और समर्पण का प्रमाण है। अपने सेवाकाल के अंतिम दिन तक, वे सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक (डीजी) के रूप में छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित डीजीपी-आईजी सम्मेलन में देश की आंतरिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए सक्रिय रूप से योगदान देते रहे। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उनके सराहनीय कार्यों की प्रशंसा की और उनकी पीठ थपथपाई।
बीएसएफ में महानिदेशक के पद से सेवानिवृत्त होने से पहले, उनके लिए एक विशेष विदाई परेड का आयोजन किया गया, जो कि बीएसएफ की परंपराओं से हटकर था। कानून (एलएलबी) और विज्ञान (बीएससी) की पढ़ाई करने वाले दलजीत चौधरी ने अपनी 35 साल की लंबी सेवा में न केवल चार वीरता पदक हासिल किए, बल्कि अति उत्कृष्ट और सराहनीय सेवाओं के लिए राष्ट्रपति के पदक से भी नवाजे गए। एक कुशल निशानेबाज के रूप में भी उनकी एक विशिष्ट पहचान रही है।
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान, उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में एडीजी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी कार्य किया। अगस्त 2024 में उन्हें डीजी बीएसएफ के पद पर नियुक्त किया गया था। बीएसएफ में उनका कार्यकाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में बल द्वारा निभाई गई उत्कृष्ट भूमिका के लिए विशेष रूप से याद किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सीमा सुरक्षा बल अकादमी ग्वालियर में ड्रोन वारफेयर स्कूल की स्थापना, छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों के तहत बीएसएफ की तैनाती का विस्तार, और समूह बी व सी के कार्मिकों के लिए कैडर समीक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण और विशिष्ट कार्यों ने उनके कार्यकाल को यादगार बनाया है।
