दलित उत्पीड़न मामला: कोर्ट ने नौ दोषियों को सुनाई तीन-तीन साल की सजा
कासगंज के सहावर थाना क्षेत्र के गांव तारापुर में घर में घुसकर मारपीट और जातिगत टिप्पणी करने के मामले में एससी/एसटी एक्ट की विशेष अदालत ने नौ दोषियों को तीन-तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही, सभी दोषियों पर नौ-नौ हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
जानकारी के अनुसार, तारापुर गांव के निवासी भगवानदास ने सहावर थाने में चंद्रभान और उसके साथियों के खिलाफ एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में बताया गया था कि आरोपियों ने उसकी फसल को नष्ट कर दिया था। जब भगवानदास ने इस संबंध में अन्य ग्रामीणों से शिकायत की, तो 10 जून 2019 की शाम लगभग सात बजे चंद्रभान और उसके कई साथी लाठी-डंडों के साथ उसके घर में घुस आए।
आरोपियों ने न केवल भगवानदास के साथ बेरहमी से मारपीट की, बल्कि उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित भी किया। इस घटना से आहत होकर भगवानदास ने स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घर में घुसकर मारपीट, एससीएसटी एक्ट की धाराओं और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।
मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट, धनंजय कुमार मिश्र की अदालत में हुई। गवाहों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर, अदालत ने चंद्रभान, पुत्तूलाल, कैलाश चंद्र, सुरेश, छोटेलाल, गिरीश चंद्र, करूआ, सुनील और रोहताश को दोषी पाया।
न्यायाधीश मिश्र ने अपने फैसले में कहा कि आरोपियों ने न केवल शारीरिक चोट पहुंचाई, बल्कि जातिगत अपमान कर सामाजिक समरसता को भी ठेस पहुंचाई है। इस कृत्य को गंभीर मानते हुए, अदालत ने सभी नौ दोषियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत तीन-तीन साल की कैद और नौ-नौ हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त कारावास भी भुगतना पड़ सकता है।
