ओडिशा में दुनिया का पहला काला टाइगर सफारी: सुप्रीम कोर्ट की अंतिम मंजूरी
ओडिशा के मयूरभंज जिले में दुनिया के पहले मेलानिस्टिक (काले) टाइगर सफारी की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है, जिससे महीनों से अटकी योजना से कानूनी बाधाएं दूर हो गई हैं। यह अनूठी सफारी मांचाबंधा क्षेत्र में स्थापित की जाएगी, जो बारीपदा से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इस परियोजना को पहले ही केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (सीजेडए) और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) से आवश्यक मंजूरी मिल चुकी थी। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय में एक लंबित याचिका के कारण परियोजना के क्रियान्वयन में देरी हो रही थी। न्यायालय के फैसले के साथ ही अब ओडिशा सरकार इस सफारी के संचालन की दिशा में आगे बढ़ सकती है। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल न केवल ओडिशा को वन्यजीव पर्यटन के मानचित्र पर एक प्रमुख स्थान दिलाएगी, बल्कि पूर्वी भारत के लिए एक सुदृढ़ वन्यजीव बचाव तंत्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
एनटीसीए और राज्य वन्यजीव अधिकारियों की एक संयुक्त सर्वेक्षण टीम ने क्षेत्रीय निरीक्षण के बाद मांचाबंधा स्थल को सफारी के लिए सबसे उपयुक्त पाया। यह सफारी लगभग 200 हेक्टेयर भूमि पर विकसित की जाएगी। इसमें से 100 हेक्टेयर भूमि विशेष रूप से बाघों के प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित की जाएगी, जबकि शेष 100 हेक्टेयर भूमि में बचाव केंद्र, पशु चिकित्सा इकाई, कर्मचारियों के लिए आवश्यक अवसंरचना और पार्किंग जैसी सहायक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। बारीपदा के आरसीसीएफ प्रकाश चंद्र गुगनानी के अनुसार, कुल 1,000 हेक्टेयर में से 200 हेक्टेयर का चयन इस परियोजना के लिए किया गया है, जो एक समग्र सुविधा केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिसमें एक अत्याधुनिक बचाव केंद्र भी शामिल होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना को कुछ महत्वपूर्ण शर्तों के साथ मंजूरी दी है। इनमें यह सुनिश्चित करना शामिल है कि विकास कार्य केवल क्षतिग्रस्त या बफर भूमि पर ही किया जाएगा। साथ ही, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 और संबंधित इको-सेंसिटिव जोन (ईसीजेड) प्रावधानों का कड़ाई से पालन किया जाएगा, ताकि बाघों के संरक्षण पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
प्रारंभिक चरण में, नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क से तीन और रांची जू से दो मेलानिस्टिक बाघों को इस सफारी में लाया जाएगा। इन बाघों को विशेषज्ञों की कड़ी निगरानी में रखा जाएगा और उनके स्वास्थ्य व व्यवहार का गहन अध्ययन किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें प्रदर्शन और संरक्षण इकाइयों में शामिल किया जाएगा।
इस परियोजना की घोषणा का स्थानीय समुदायों और वन्यजीव प्रेमियों द्वारा व्यापक रूप से स्वागत किया गया है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि ये दुर्लभ काले बाघ मयूरभंज की एक विशिष्ट पहचान हैं। इस सफारी के बनने से पर्यटकों को अब सिमिलिपाल राष्ट्रीय उद्यान तक लंबी यात्रा किए बिना ही इन अद्भुत जीवों को देखने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा।
