दिल्ली में 2 लाख से अधिक श्वसन संबंधी बीमारियों के मामले, जहरीली हवा बनी वजह
दिल्ली में वायु प्रदूषण का गंभीर स्तर श्वसन संबंधी बीमारियों के रूप में विकराल रूप धारण कर रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 से 2024 के बीच राजधानी में एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस (ARI) के दो लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं। यह खुलासा तब हुआ जब राज्यसभा में एक प्रश्न के जवाब में स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्वीकार किया कि वायु प्रदूषण श्वसन संबंधी बीमारियों के लिए एक प्रमुख ‘ट्रिगरिंग फैक्टर’ है।
यह जानकारी सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह सहनी द्वारा इस बीमारी के बढ़ते मामलों पर सवाल उठाए जाने के बाद सामने आई। स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने लिखित जवाब में बताया कि सरकार रोग निगरानी प्रणाली को मजबूत कर रही है और स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य प्रभावों पर कई कारकों का जटिल प्रभाव पड़ता है, जिनमें खान-पान की आदतें, व्यावसायिक आदतें, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, पूर्व चिकित्सा इतिहास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और वंशानुगत कारण शामिल हैं।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) द्वारा संकलित ये आंकड़े दिल्ली के छह चयनित निगरानी अस्पतालों से प्राप्त हुए हैं। इन अस्पतालों में आपातकालीन विभाग में आने वाले कुल मरीजों में से लगभग 12.6% यानी 33,213 मरीज ARI से पीड़ित थे। यह आंकड़ा वायु प्रदूषण के गंभीर स्वास्थ्य परिणामों को दर्शाता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को इन स्थितियों से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय हर साल एडवाइजरी जारी करता है और वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के अलर्ट साझा करता है, ताकि अस्पताल मरीजों की बढ़ती संख्या के लिए पहले से तैयारी कर सकें। अधिकारियों के अनुसार, खराब वायु गुणवत्ता अस्थमा, सीओपीडी, हृदय रोग या कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में सांस की समस्याओं को और बढ़ा रही है, जिससे उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है।
