दिल्ली का कचरा संकट: द्वारका की सड़कें बनीं कूड़े के ढेर, लैंडफिल पर निर्भरता कम करने का सपना अधूरा
दिल्ली को कचरा मुक्त बनाने और लैंडफिल पर निर्भरता कम करने की कवायद राजधानी में कहीं भी कारगर होती नहीं दिख रही है। पश्चिमी दिल्ली की सबसे सुनियोजित मानी जाने वाली उपनगरी द्वारका की सड़कें कूड़े के विशाल ढेरों से अटी पड़ी हैं, जो किसी छोटी लैंडफिल साइट का अहसास कराती हैं। यह स्थिति स्थानीय निवासियों के लिए गंभीर चिंता और परेशानी का कारण बन गई है।
नगर निगम ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों का स्पष्ट निर्देश है कि स्थानीय अधिकारी कचरे के वैज्ञानिक उपचार और निपटान की व्यवस्था करें, ताकि लैंडफिल पर दबाव कम हो सके। लेकिन द्वारका में हालात इसके विपरीत नजर आते हैं। आए दिन रिहायशी इलाकों और पार्कों के आसपास कचरे के इतने बड़े ढेर देखे जाते हैं कि कुछ देर खड़े रहना भी मुश्किल हो जाता है। कुछ समय पहले, सेक्टर 14 मेट्रो स्टेशन के पास एक बड़े मैदान और पार्क के बीच की सड़क कूड़े से भरी पाई गई थी। तब मानसून के कारण डंपरों को लैंडफिल साइट तक पहुंचने में हो रही असुविधा को इसका कारण बताया गया था।
हालांकि, बारिश का मौसम बीत चुका है और लैंडफिल साइट पर डंपरों के आवागमन में अब कोई बाधा नहीं है, फिर भी उपनगरी में कचरा डंप करने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। हाल ही में, सेक्टर 13 मेट्रो स्टेशन के पास अभिनव स्कूल की ओर जाने वाली एक सुनसान सड़क के बड़े हिस्से को कूड़े से पाट दिया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि यह स्थान एक निजी स्कूल, एक सरकारी स्कूल और डीडीए के एक अपार्टमेंट के बहुत करीब है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यहां लंबे समय से शहर के विभिन्न हिस्सों से कचरा लाकर डंप किया जा रहा है, जो पूरी तरह से गलत है। यह सड़क डीडीए के अधीन होने के बावजूद, न तो नगर निगम और न ही डीडीए इस समस्या पर ध्यान दे रहा है। स्कूलों के पास होने के कारण, विशेष रूप से छुट्टियों के दौरान विद्यार्थियों को इस मार्ग से गुजरते समय काफी परेशानी होती है।
लोगों का कहना है कि मुख्य सड़कों के किनारे बने कूड़ा घरों में कंपेक्टर मशीनें लगी हैं या कुछ बंद कर दिए गए हैं। निगमकर्मियों को डर है कि यदि मुख्य सड़कों पर कचरा दिखाई देगा तो उनकी लापरवाही पकड़ी जाएगी। इससे बचने के लिए, उन्होंने अब मुख्य सड़कों से हटकर सुनसान सड़कों पर कचरा डंप करने की नई तरकीब अपनाई है, जिनका इस्तेमाल बहुत कम होता है।
इस संबंध में नगर निगम के अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि जहां कचरा जमा है, उसे उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही स्थिति में सुधार नजर आएगा। हालांकि, स्थानीय लोग सरकारी दावों पर संदेह जता रहे हैं और इस समस्या का स्थायी समाधान चाहते हैं।
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