डिजिटल अरेस्ट का जाल: बैंक मैनेजर की सतर्कता से टला 6 करोड़ का फ्रॉड
साइबर ठगों ने एक बार फिर अपनी ठगी का नया तरीका अपनाया है। गुरुग्राम में एक वरिष्ठ नागरिक को निशाना बनाकर डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से करोड़ों की ठगी का प्रयास किया गया। ठगी की गई रकम का एक बड़ा हिस्सा जमशेदपुर के एक खाते में ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन बैंक मैनेजर की सतर्कता ने पीड़ित को लगभग 6 करोड़ रुपये की चपत लगने से बचा लिया।
यह घटना 11 और 12 नवंबर की बताई जा रही है। गुरुग्राम के गैलेरिया मार्केट स्थित एक बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर मीत सबरवाल ने अपने एक बुजुर्ग ग्राहक के खाते से अचानक बड़ी रकम के ट्रांसफर होते देखा। ग्राहक ने लगभग 5.9 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड तोड़े थे और रकम आते ही 20 लाख रुपये जमशेदपुर के एक एसबीआई खाते में और 44 लाख रुपये मुंबई के बांद्रा स्थित खाते में ट्रांसफर कर दिए गए थे।
बैंक मैनेजर को इतने कम समय में हुए इस बड़े लेनदेन पर संदेह हुआ। जब उन्होंने ग्राहक से संपर्क करने की कोशिश की, तो बुजुर्ग डर के मारे फोन नहीं उठा रहे थे। बाद में पता चला कि खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर साइबर ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर रखा था। ठगों ने पीड़ित को जेल भेजने का डर दिखाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाए थे।
तत्काल कार्रवाई करते हुए बैंक मैनेजर ने जमशेदपुर एसबीआई और मुंबई एक्सिस बैंक से संपर्क किया। उनकी त्वरित कार्रवाई से दोनों ट्रांजेक्शन होल्ड कर दिए गए और संबंधित खाते फ्रीज कर दिए गए। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि जमशेदपुर में जिस खाते में 20 लाख रुपये आए थे, वह संभवतः एक म्यूल अकाउंट था, जिसका इस्तेमाल ऐसे फ्रॉड के लिए किया जाता है।
हालिया पुलिसिया कार्रवाइयों से यह भी पता चलता है कि साइबर अपराधी अब जमशेदपुर के युवाओं को अपना मोहरा बना रहे हैं। कदमा और गोलमुरी जैसे इलाकों से ऐसे कई युवकों की गिरफ्तारी हुई है जो कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते साइबर ठगों को किराए पर दे देते हैं। ठगी का पैसा इन्हीं खातों में आता है और फिर तुरंत निकाल लिया जाता है। गुरुग्राम मामले में भी यही पैटर्न देखने को मिला।
गुरुग्राम पुलिस ने पुष्टि की है कि जमशेदपुर और मुंबई के खातों में फ्रीज की गई कुल 64 लाख रुपये की राशि अब पीड़ित को रिफंड की जा रही है। बैंक मैनेजर मीत सबरवाल की इस सूझबूझ और त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस कमिश्नर ने उन्हें 20 हजार रुपये का इनाम और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया है। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट जैसी कार्रवाई नहीं करती है, और ऐसे किसी भी कॉल पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
