दहेज हत्यारोपी पति और सास की जमानत याचिका खारिज, न्याय की उम्मीद जगी
दहेज की लालच में एक विवाहिता की जान लेने के आरोपी पति और सास को जिला जज विकास कुमार की अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने दोनों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले से मामले में न्याय की उम्मीद जगी है और मृतका के परिवार को कुछ राहत मिली है।
मामला जैंत थाना क्षेत्र के नगला ब्राह्मण बढ़ौता का है, जहाँ 9 जुलाई 2025 को महिमा नामक विवाहिता का शव फांसी पर लटका मिला था। इस घटना ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिमा के शरीर और गले पर मिले चोट के निशान इस ओर इशारा कर रहे थे कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या है।
मृतका के भाई पुनीत कुमार ने अपनी शिकायत में पति संतोष शर्मा, ससुर डालचंद उर्फ पप्पू और सास लक्ष्मी देवी पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया कि दहेज की मांग पूरी न होने पर परिवार के सदस्यों ने मिलकर उसकी बहन महिमा की बेरहमी से हत्या कर दी और फिर शव को फंदे पर लटका दिया, ताकि यह आत्महत्या लगे।
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए कार्रवाई की। 21 जुलाई को मृतका के पति संतोष शर्मा को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद, 11 अगस्त को सास लक्ष्मी देवी और फिर 2 अक्तूबर को ससुर डाल चंद उर्फ पप्पू को भी गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
अदालत में जमानत याचिका का विरोध करते हुए जिला शासकीय अधिवक्ता शिवराम सिंह तरकर ने सभी तथ्यों और सबूतों को मजबूती से पेश किया। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोपियों के खिलाफ हत्या के पुख्ता सबूत हैं और उन्हें जमानत पर रिहा करने से मामले की जांच प्रभावित हो सकती है। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए पति और सास की जमानत याचिका खारिज कर दी। पूर्व में आरोपी ससुर की जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है, जिससे यह स्पष्ट है कि अदालत इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
