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देहरादून: 20 लाख पानी में, कौलागढ़-सहस्रधारा पेयजल योजनाएं अधर में लटकीं

By Nov 12, 2025

देहरादून। राजधानी दून के कौलागढ़ और सहस्रधारा रोड क्षेत्रों में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जल संस्थान द्वारा अमृत योजना के अंतर्गत तैयार की गई दो महत्वाकांक्षी योजनाएं फिलहाल अधर में लटक गई हैं। इन योजनाओं के सर्वे और एस्टीमेट तैयार करने में करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जा चुके हैं, बावजूद इसके पानी की उपलब्धता ही सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। प्रस्तावित नहरों में गर्मी के मौसम में पर्याप्त जल उपलब्ध न रहने की आशंका के चलते दोनों क्षेत्रों के हजारों घरों के लिए आगामी ग्रीष्मकाल में जल संकट गहराने का खतरा मंडरा रहा है।

जानकारी के अनुसार, सहस्रधारा रोड क्षेत्र, विशेष रूप से मयूर विहार से पैसिफिक गोल्फ तक, के लिए 173 करोड़ रुपये की एक विशाल योजना का खाका बीते जनवरी में तैयार किया गया था। इस योजना के तहत जाखन नहर से प्रतिदिन 27 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी पंप करने और पैसिफिक के समीप जल उपचार संयंत्र (डब्ल्यूटीपी) तथा 28 ओवरहेड टैंक बनाने का प्रस्ताव था। लगभग 15 हजार घरों को जल कनेक्शन देने की इस योजना के सर्वे और एस्टीमेट पर करीब 15 लाख रुपये का व्यय हुआ। सिंचाई विभाग ने नहर से पानी लेने के लिए एनओसी भी जारी कर दी थी, लेकिन अब यह स्पष्ट हो गया है कि जाखन नहर में केवल 90 क्यूसेक पानी है, जिसमें से एक अन्य योजना पहले से ही पानी ले रही है। गर्मियों में जलस्तर घटने पर इस नहर से पर्याप्त पानी की उपलब्धता लगभग असंभव होगी।

इसी तरह, कौलागढ़ क्षेत्र के लगभग पांच हजार घरों को पेयजल आपूर्ति देने के लिए 44 करोड़ रुपये की योजना बनाई गई थी। इसमें बीजापुर नहर से आठ एमएलडी पानी पंप करने का प्रस्ताव था। किंतु बीजापुर नहर में मात्र 60 क्यूसेक पानी उपलब्ध है, जिसमें से सात एमएलडी पानी पहले से ही दिलाराम चौक क्षेत्र को आपूर्ति किया जा रहा है। इस योजना के सर्वे और एस्टीमेट पर जल संस्थान ने करीब पांच लाख रुपये खर्च किए हैं। स्पष्ट है कि गर्मी के समय इस योजना से भी पर्याप्त जल आपूर्ति की उम्मीद नहीं की जा सकती।

कौलागढ़ योजना को शासन से बजट स्वीकृति मिल चुकी है और जल संस्थान ने इसके निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू की थी, लेकिन किसी कारणवश वह टेंडर निरस्त कर अब पुनः प्रक्रिया चलाई जा रही है। वहीं, सहस्रधारा रोड की योजना को अभी तक शासन से बजट स्वीकृति नहीं मिली है, जिससे इसका भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। सिंचाई विभाग ने नहरों के संवर्धन की शर्त पर जल संस्थान को पानी लेने की एनओसी दी है, जिसके लिए बजट भी स्वीकृत हुआ है। हालांकि, संवर्धन के बाद वास्तविक जल क्षमता कितनी बढ़ेगी, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।

इस संबंध में, जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक धर्मेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि योजनाओं के निर्माण की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने दावा किया कि नहरों में पानी की कोई कमी नहीं है और संस्थान इन योजनाओं को प्राथमिकता से पूरा करने की दिशा में काम कर रहा है, ताकि आगामी गर्मियों में कौलागढ़ और सहस्रधारा रोड में पेयजल संकट गहराने से बचा जा सके। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती दिख रही है, जिससे हजारों परिवारों पर जल संकट का खतरा मंडरा रहा है।

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