डेढ़ साल बाद भी विधवा को नहीं मिली सरकारी सहायता, परिवार बेहाल
नवादा के वारिसलीगंज से एक हृदय विदारक समाचार सामने आ रहा है, जहां मकनपुर गांव के सामाजिक कार्यकर्ता नीरज ठाकुर की मौत के डेढ़ साल बाद भी उनके परिवार को सरकारी सहायता का इंतजार है। बालू लदे ट्रैक्टर की चपेट में आने से असमय काल के गाल में समा चुके नीरज अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी उगंती और बूढ़ी मां आर्थिक तंगी से जूझ रही हैं।
परिवार को केवल 20 हजार रुपये की पारिवारिक लाभ राशि मिली है, जबकि आंगनबाड़ी में सहायिका के पद पर नौकरी दिलाने का सरकारी वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। नीरज के पीछे उनकी पत्नी, बूढ़ी मां और तीन बच्चे हैं, जिनकी परवरिश पूरी तरह से अब मुश्किल हो गई है। घर का एकमात्र सहारा, सैलून चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाला नीरज, अब इस दुनिया में नहीं है।
नीरज अपने मिलनसार स्वभाव के कारण सभी समुदायों में प्रिय थे। उनकी आकस्मिक मृत्यु ने परिवार को रोजी-रोटी के संकट में डाल दिया है। घर में 76 वर्षीय वृद्ध विधवा मां और युवा विधवा पत्नी के पास आय का कोई जरिया नहीं बचा है। ऐसे कठिन समय में, बिहार नाई समाज के प्रखंड इकाई के युवा अध्यक्ष डॉ. कमलेश शर्मा देवदूत बनकर सामने आए हैं। उन्होंने अपने निजी स्कूल, संस्कार पब्लिक स्कूल में नीरज के तीनों बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने का बीड़ा उठाया है, जो एक सराहनीय कदम है।
पीड़ित विधवा उगंती ने बताया कि किसी भी विपत्ति का सामना करने में उन्हें और उनकी सास को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। घटना के समय प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा आंगनबाड़ी में नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन वह भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है। आपदा विभाग से मिलने वाली राशि भी परिवार को नहीं मिल पाई है। जैसे-तैसे दो विधवाओं सहित छह सदस्यों का भरण-पोषण, वस्त्र, दवा और अन्य जरूरतें पूरी हो रही हैं।
मकनपुर निवासी 35 वर्षीय नीरज का जीवन अभावों में बीता था। बचपन में ही पिता का साया सिर से उठ गया था। होश संभालने पर उन्होंने सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ सैलून चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण शुरू किया था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज उनका परिवार सरकारी सहायता की बाट जोह रहा है, जबकि बच्चों का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है।
