क्रिप्टोकरेंसी से साइबर फ्रॉड का काला धन सफेद, ऑनलाइन गेमिंग बना जरिया: बस्ती पुलिस
उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो साइबर फ्रॉड से कमाए गए काले धन को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से सफेद कर रहा है। यह गिरोह जरूरतमंदों को लालच देकर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाता है। इन खातों में साइबर ठगी से अर्जित धन को मंगाया जाता है और फिर उसे क्रिप्टोकरेंसी, जैसे बिटकॉइन और यूएसडीटी में बदला जाता है। ऑनलाइन गेमिंग भी इस काले धन को खपाने का एक जरिया बन रहा है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह अपराधी टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके आपस में संपर्क साधते हैं। वे लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके या उनके परिचितों के बैंक खातों का उपयोग करते हैं। इन खातों में थोड़ी-थोड़ी रकम भेजकर, उन्हें क्रिप्टोकरेंसी खरीदने का निर्देश दिया जाता है। इसके बाद, वे टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) का पता देकर क्रिप्टो वॉलेट में पैसे जमा करा लेते हैं। अधिकांश मामलों में वेब 3.0 तकनीक पर आधारित नॉन-कस्टोडियल वॉलेट का उपयोग किया जाता है, जिससे उन्हें ट्रेस करना मुश्किल हो जाता है। इस पूरी प्रक्रिया में 10% कमीशन का खेल चलता है।
बस्ती जनपद में ऐसे 38 बैंक खाते सामने आए हैं, जिनके सत्यापन के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से कुल 74 शिकायतें दर्ज पाई गईं। इन खातों के माध्यम से लगभग 4 करोड़ 49 लाख 61 हजार रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार, यदि कस्टोडियल क्रिप्टो वॉलेट (जैसे बाइनेंस, वज़ीरएक्स) का उपयोग किया जाता है, तो उन्हें ट्रेस करना आसान होता है क्योंकि वे केवाईसी (KYC) जैसे रिकॉर्ड रखते हैं। हालांकि, नॉन-कस्टोडियल वॉलेट की पहचान मुश्किल होती है। इस रैकेट का खुलासा आम जनता के लिए एक चेतावनी है कि कैसे उनकी पहचान का दुरुपयोग करके अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है।
