बरला के 250 साल पुराने शिव मंदिर में महाशिवरात्रि पर उमड़ेगी भक्तों की भीड़, जानें इतिहास | Barla Mahashivratri
महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर बरला क्षेत्र के प्राचीन शिवालयों में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। इसी कड़ी में बरला मोड़ के समीप स्थित लगभग 250 वर्ष पुराना शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि पूर्वजों के संघर्ष और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक भी है। इस सिद्ध पीठ पर हजारों भक्त जलाभिषेक के लिए उमड़ेंगे, जहां मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है। Barla Mahashivratri के अवसर पर स्थानीय प्रशासन और मंदिर समिति ने व्यापक व्यवस्थाएं की हैं।
मंदिर के प्रबंधक विकास अग्रवाल के अनुसार, उनके पूर्वज राधाकृष्ण जी के समय में गांव में मंदिर निर्माण और शंख बजाने पर प्रतिबंध था। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, उनके पूर्वजों ने अपनी निजी भूमि पर गांव के बाहर इस मंदिर का निर्माण कराया, ताकि भक्ति की धारा निर्बाध रूप से प्रवाहित हो सके। आज राधाकृष्ण जी की पांचवीं पीढ़ी इस मंदिर की सेवा और देख-रेख कर रही है, जो इस ऐतिहासिक विरासत को सहेज रही है।
इस प्राचीन मंदिर परिसर में पूरा शिव परिवार, शिवलिंग और हनुमान जी की भव्य मूर्तियां स्थापित हैं। मंदिर के समीप एक प्राचीन पीपल के पेड़ के नीचे शनि महाराज विराजमान हैं। परिसर में स्थित 250 वर्ष से अधिक पुराने बरगद और पीपल के विशाल पेड़ इसकी प्राचीनता के साक्षी हैं। यहां एक प्राचीन कुआं भी है, जिसका उपयोग पूर्वजों द्वारा राहगीरों के लिए प्याऊ के रूप में किया जाता था, जो तत्कालीन सामाजिक सेवा का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
क्षेत्रवासियों की अटूट मान्यता है कि यह एक सिद्ध स्थान है, जहां कई संतों और महात्माओं ने तपस्या की है। महाशिवरात्रि के दिन यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए एकत्र होते हैं। मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन ‘सत्य राधा कृष्ण सेवा संस्था’ समिति द्वारा किया जा रहा है, जिसमें अध्यक्ष सोनू अग्रवाल, प्रबंधक विकास अग्रवाल और कोषाध्यक्ष अमरदीप अग्रवाल जैसे पदाधिकारी शामिल हैं। यह मंदिर क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो पीढ़ियों से आस्था का केंद्र बना हुआ है।
